मधुर मिलन का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नवेली दुल्हन को, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबो में डूबी रहती है, दिन रात सताती याद उन्हें। होती रिमझिम… Read More
मधुर मिलन का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नवेली दुल्हन को, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबो में डूबी रहती है, दिन रात सताती याद उन्हें। होती रिमझिम… Read More
पिपासा तृप्त करने प्यासी धरा की बादल प्रेम सुधा बरसाने आया है अब तुम भी आ जाओ मेरे जीवन प्रेमाग्नि जलाने सावन आया है देखकर भू की मनोहर हरियाली नभ के हिय में प्रेम उमड़ आया है रिमझिम फुहारें पड़ीं… Read More
वो तो भूल गए कि उनको, बनाया किसने था चलना पकड़ के ऊँगली, सिखाया किसने था वो कहते हैं कि मंज़िल क़रीब है उनकी अब, पर भूल गए कि ये रास्ता, दिखाया किसने था होते हैं बहुत खुश जब देखते… Read More
आजकल अपने अतीत को कुरेद रही हूँ । कई बार जब खुद के बारे में सोचती हूँ तो जीवन के बीते हुए तमाम दिन जुगनू की तरह जगमगाने लगते हैं। ज़िन्दगी उन जुगनुओं की रौशनी में वक्त के अंधेरे में… Read More
लगाकर दिल तुम अपना, फिर मुँह मोड़ा न करो। किसी के दिल से तुम, इस तरह खेला न करो। मिले थे दिल हमारे, तभी तो साथ हुए थे। पर अब क्या हुआ तुमको, जो रूठ गये हम से।। बड़ी बड़ी… Read More
खो न जाऊँ कहीं, अपनों के बीच से। इसलिए लिखता हूँ, गीत कविता आपके लिए। ताकि बना रहे संवाद, हमारा आप के साथ। और मिलता रहे सदा, आप सभी का आशीर्वाद।। दिल में जो आता है, मैं वो लिख देता… Read More
कल रात जब वो आई थी घर मेरे तब होने लगी थी बेमौसम बारिश सिर्फ़ संयोग था बादलों का बरसना या थी कुदरत की वह एक साज़िश। मिली थी वह मुझसे पिछले बरस ही पर हम अब तक मिल ना… Read More
श्रम की मूरत, छली गई है अलग अलग के दौर में जब संकट आया भू, पर मलाई उड़ाई किसी और ने छलिया है चालाक बहुत पल में गुस्सा पल में आँसू हँस- हँसकर बातें करता अंदर बाहर में चेहरा लटका… Read More
“लिखना, प्रामाणिक पढ़ते रहने का सुबूत है।” – शैलेंद्र कुमार शुक्ल अच्छा! बात तो ये भी सच है कि स्वर्गीय दादा गोपालदास ‘नीरज’ प्रत्येक गँवई शहरी ज़िन्दगी के प्रत्येक गली घर के -चौराहे से लेकर इस देश के संसद में… Read More
तुम ही कहो, कैसे कटेंगे वो पल जिस पल में तुमने कहा था हम साथ रहेंगे हरपल अब मेरी धड़कनों की आवाज से तुम कैसे रू-ब-रू होगे किसी गैर को सीने से लगाकर उस पल में मुझे तुम भूल… Read More