Ramchandra Shukla

शोध लेख : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की हिन्दी दृष्टि

यह शत प्रतिशत सत्य है कि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की साहित्यिक दृष्टि को समझे बगैर हिन्दी साहित्य को समझ पाना आज भी आकाश कुसुम जैसा है। उनकी स्थापनाओं से टकराए बगैर न तो समीक्षक आगे बढ़ सकते हैं और न… Read More

मूवी रिव्यू : ब्रेथ इन टू द शैडोज़

रॉबर्ट  ब्लॉच ने सन 1959 में मनोवैज्ञानिक थ्रिलर उपन्यास साइको (Psycho) लिखा था, जो आश्चर्यजनक ढंग से उसी दौरान या उपन्यास लेखन के बाद अमेरिका में घटी कुछ मल्टी पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर या डिसोसियेटिव पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर या हिन्दी में बहु व्यक्तित्व… Read More

shatranj ke khilari 1977

फिल्म समीक्षा‌ : शतरंज के खिलाड़ी 1977

शतरंज के खिलाड़ी प्रेमचन्द की वह कहानी है, जिसमें उन्होंने डलहौजी की हड़प नीति का शिकार बनते अवध की कहानी को दर्शाया है, जो अवध के नवाब वाजिद अली शाह के नेतृत्व में ऐशो आराम में बेफिक्र होकर सोया हुआ… Read More

वेदबुक से फेसबुक तक स्त्री

स्त्री सम्मान के प्रतीक विश्व महिला दिवस के अवसर पर विश्व की समस्त मातृ शक्ति को नमन करते हुए प्रस्तुत है मेरी पुस्तक  “वेदबुक से फेसबुक तक स्त्री” का मेरी बात अंश :           #मेरी_बात जिस समय… Read More

दीपावली : विजय का प्रतीक

दीपावली प्रभु श्रीराम की रावण पर विजय के उपरांत अयोध्या के उत्सव का प्रतीक है, जहां उनके भव्य राजतिलक के अवसर पर अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर उनके राजतिलक की स्मृतियों को शाश्वत कर दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार… Read More

हम सबको आज़ादी मुबारक़

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी की अदला बदली, लाखों लोगों के विस्थापन और लाखों निर्दोषों का लहू बहाने के बाद 14-15 अगस्त की मध्य रात्रि को हमें मिली आज़ादी की खुशबू कुछ अधिक प्रीतिकर होती अगर विभाजन का दंश हमें… Read More

ये कश्मीर है…

इस बार ईदुल अजहा पर कश्मीर की शांति देखकर मन प्रसन्न है। संभवतः यह पिछले बीस वर्षों की यह पहली ईद होगी, जिसमें सर्वत्र शांति है और देशद्रोही ताक़तों के हौसले पस्त हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि कश्मीर… Read More

फ्रेंडशिप डे पर विशेष : दोस्त हमारे जान से प्यारे

मित्रता एक बहुमूल्य रत्न है क्योंकि अन्य सारे रिश्ते-नाते तय करने में हमारा कोई योगदान नहीं होता, माँ, पिता, भाई, बहन आदि रिश्ते जन्म से ही दाय में मिलते हैं। यहां तक कि पति पत्नी का रिश्ता भी तय करने… Read More

munshi premchand

वर्तमान समय में प्रेमचंद की प्रासंगिकता

प्रेमचंद को पढ़ना उन चुनौतियों को प्रत्यक्ष अनुभूत करना है, जिन्हें भारतीय समाज बीते काफी समय से झेलता आया है और आज भी उन चूनौतियों का हल नहीं ढूँढ पाया है। दलित, स्त्री, मजदूर, किसान, ऋणग्रस्तता, रिश्वतखोरी, विधवाएँ, बेमेल विवाह,… Read More

THE LION KING : मूवी रिव्यू

हॉलीवुड फिल्मों की यह खूबी है कि इसमें एक बेहद सादी और सरल सी कहानी को एक शानदार तरीके से कहकर महफ़िल लूटी जा सकती है और द लायन किंग फ़िल्म यही कारनामा करती है। जंगल के राजा के सिंहासन… Read More