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लेख : जरूरी है वक़्त के साथ बदलाव

तेजी के साथ बदलते मूल्यों, नई पीढ़ी ओर पुरानी परम्परागत व्यवस्था का टकराव लाज़मी है, पर समाज अपने आप नहीं बदलता। बदलाव तभी होगा जब पीड़ाओं से गुजरने के बजाय उन समस्याओं का हल ढूंढे। तेजी के आगे बढ़ने वाला… Read More

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लेख : खामोशियाँ

खामोशी हृदय की एक अवस्था और परिस्थिति की एक मांग भी होती है। कभी कभी खामोशी वो भी कह देती जो शोर नहीं कह पाता। खामोशियों की भी अपनी जबान होती है जो हर किसी को समझ नहीं आती। कभी… Read More

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स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है । हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे । अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर… Read More

rambhadracharya ji

आधुनिक काल के सूरदास प्रज्ञाचक्षु रामभद्राचार्य जी

सनातन धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है। वेदों और पुराणों के मुताबिक सनातन धर्म तब से है जब ये सृष्टि ईश्वर ने बनाई। जिसे बाद में साधु और संन्यासियों ने आगे बढ़ाया। ऐसे ही आठवीं सदी… Read More

happy independence Day

स्वतंत्रता या उच्छृंखलता- जिम्मेदार कौन

आजादी की 74वीं वर्षगांठ के हम गवाह बन रहे हैं। हमारा देश इस वर्ष कोरोना महामारी का वैश्विक आपातकाल में समाया हुआ था, यह वर्ष दो हजार बीस इस सदी का सबसे भयानक वर्ष माना जाएगा,इस बीच जब हम स्वतंत्रता… Read More

rahat indauri

शायरी का अज़ीम चित्रकार “राहत”

दो गज ही सही मेरी मिल्कियत तो है। ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया। इंदौर की धरती और अदब आज उदास है, रेख़्ता मायूसी से घिरा हुआ है, हिंदवी अपनी गंगा जमुनी विरासत को सहेजने सहेजते असहज सी हो… Read More

sohar geet

भोजपुरी लोक गीत परम्परा में अगली कड़ी सोहर गीत

भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र अर्थात उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और बिहार के लगभग आधे हिस्से में तरह-तरह के गीतों का प्रचलन देखने को मिलता है, इन्हीं गीतों में से एक गीत सोहर भी है । कुछ लोग परिचित होंगे कि यह… Read More

happy shree krishna janmastami

श्रीकृष्ण जन्‍माष्‍टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

रूप बड़ा प्यारा है, चेहरा बड़ा निराला है बड़ी से बड़ी मुसीबत को कन्हैया जी ने पल भर में हल कर डाला है!! मुरली मनोहर ब्रिज के धरोहर वह नंदलाल गोपाला है, बंसी की धुन पर सब दुख हरनेवाला मुरली… Read More

man alone and thinking

सही और ग़लत के बीच

सही और ग़लत के बीच भी बहुत कुछ ऐसा होता जिससे परिस्थितियों का निर्माण होता है । सही कोई क्यो है ? जितना महत्वपूर्ण यह प्रश्न है उतना ही महत्वपूर्ण इसका जवाब भी तलाशना होता है कि कोई गलत क्यों… Read More

indian class room

नई शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा में मातृभाषा विषयक अवधारणा के निहितार्थ

नई शिक्षा नीति में बहुत से परिवर्तन लक्षित होते हैं । यह परिवर्तन समय की मांग भी थी क्योंकि 1986 के उपरांत बहुत सी स्थितियां बदली है जिससे हमारे शिक्षा नीति में भी परिवर्तन की मांग मुखर होने लगी थी… Read More