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लेख : नारी, माया या देवी

नवरात्रि में दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली शक्ति रूपा स्त्री आज अधिकांश रूप में बेबस और लाचार नजर आती है। नारी का रूप बदला है, किन्तु नारी के प्रति संकीर्ण अवधारणाएं आज भी नहीं बदली है। आज भी… Read More

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लेख : भाषा विज्ञान कला है या विज्ञान

भाषा विज्ञान पर विचार करते समय हमें यह ज्ञात होता है कि जिसमें भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए वही भाषा विज्ञान है तो स्पष्ट ही यह विज्ञान है। दरअसल विज्ञान शब्द का मूल अर्थ ‘विशिष्ट ज्ञान’ है। उपनिषदों में… Read More

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लेख : “हिन्दी दिवस” एक दिन की जिम्मेवारी

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी भाषा भी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। हिंदी यद्यपि भारत के कई क्षेत्रों में बोली जाती थी, इसी के फलस्वरूप सन 1953 से पूरे भारत में… Read More

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लेख : जरूरी है वक़्त के साथ बदलाव

तेजी के साथ बदलते मूल्यों, नई पीढ़ी ओर पुरानी परम्परागत व्यवस्था का टकराव लाज़मी है, पर समाज अपने आप नहीं बदलता। बदलाव तभी होगा जब पीड़ाओं से गुजरने के बजाय उन समस्याओं का हल ढूंढे। तेजी के आगे बढ़ने वाला… Read More

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लेख : खामोशियाँ

खामोशी हृदय की एक अवस्था और परिस्थिति की एक मांग भी होती है। कभी कभी खामोशी वो भी कह देती जो शोर नहीं कह पाता। खामोशियों की भी अपनी जबान होती है जो हर किसी को समझ नहीं आती। कभी… Read More

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स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है । हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे । अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर… Read More

rambhadracharya ji

आधुनिक काल के सूरदास प्रज्ञाचक्षु रामभद्राचार्य जी

सनातन धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है। वेदों और पुराणों के मुताबिक सनातन धर्म तब से है जब ये सृष्टि ईश्वर ने बनाई। जिसे बाद में साधु और संन्यासियों ने आगे बढ़ाया। ऐसे ही आठवीं सदी… Read More

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स्वतंत्रता या उच्छृंखलता- जिम्मेदार कौन

आजादी की 74वीं वर्षगांठ के हम गवाह बन रहे हैं। हमारा देश इस वर्ष कोरोना महामारी का वैश्विक आपातकाल में समाया हुआ था, यह वर्ष दो हजार बीस इस सदी का सबसे भयानक वर्ष माना जाएगा,इस बीच जब हम स्वतंत्रता… Read More

rahat indauri

शायरी का अज़ीम चित्रकार “राहत”

दो गज ही सही मेरी मिल्कियत तो है। ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया। इंदौर की धरती और अदब आज उदास है, रेख़्ता मायूसी से घिरा हुआ है, हिंदवी अपनी गंगा जमुनी विरासत को सहेजने सहेजते असहज सी हो… Read More

sohar geet

भोजपुरी लोक गीत परम्परा में अगली कड़ी सोहर गीत

भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र अर्थात उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और बिहार के लगभग आधे हिस्से में तरह-तरह के गीतों का प्रचलन देखने को मिलता है, इन्हीं गीतों में से एक गीत सोहर भी है । कुछ लोग परिचित होंगे कि यह… Read More