gulami

कविता : गुलामी

हम जात पात में पड़े रहेंगे। और देश को बर्बाद करेंगे। दूसरे देश प्रगति को चुनेंगे। और विश्व में पहचान बनाएंगे।। गये थे जब अंग्रेज देश से तो जाति का बीज वो गये थे। जिससे आपसी भाई चारा देश में… Read More

kaisi aadhunikta

कविता : कैसी आधुनिकता

पहले चिट्ठी आती थी पढ़ते थे हफ्तों तक फोन पर अब तो बाते हुई सीमित जैसे छोटे हो दिन।। वो भी क्या दिन थे, जब मिल घंटो बतियाते थे अब चलते – चलते मुलाकाते हुई।। सावन के झूले तीज त्यौहार… Read More

makar sankranti

कविता : मकर संक्रांति आई है

मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई है निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें हैं जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई है मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई… Read More

makar sankranti aur vigyan

लेख : मकर संक्रांति और विज्ञान

जी हाँ! पूस का महीना खत्म हो चुका और माघ का महीना आ चुका है। देखते ही देखते मकर संक्रांति का त्यौहार आ गया है। ज्योतिषी, धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से आज के दिन का बहुत महत्व है। इसी… Read More

2021

कविता : नव वर्ष 2021 दे आपको…

करे न कोई गम अब जाते हुए 2020 का। जो बीता सो बीता अब गुजर गया साल। सीखा गया जाते जाते लोगों के दिल में प्रेमभाव। नहीं आया विपत्ति में धन-दौलत अब की बार। भूला कर अपने सारे गम करें… Read More

badlav

लेख : जरूरी है वक़्त के साथ बदलाव

तेजी के साथ बदलते मूल्यों, नई पीढ़ी ओर पुरानी परम्परागत व्यवस्था का टकराव लाज़मी है, पर समाज अपने आप नहीं बदलता। बदलाव तभी होगा जब पीड़ाओं से गुजरने के बजाय उन समस्याओं का हल ढूंढे। तेजी के आगे बढ़ने वाला… Read More

aurat

कविता : औरत

औरत मात्र  तन नहीं, एक मन भी होती है। जिसके मन के समंदर में, तैरती है सपनों की नाव। जो चाहती है पाना अपने, खोये हुए वजूद को। दिखाना चाहती है अपने, अंदर छिपी प्रतिभाओं को। महसूस कराना चाहती है,… Read More

soch badlo

कविता : सोच बदलो

आगे निकलने की होड़ छोड़ मिलकर कदम बढ़ाओ बदलो न रास्ता मुश्किल में देख बन दुख में साथी दूसरों की हिम्मत बँधाओ घर, बाहर बहू -बेटी, महसूस सुरक्षित करें हो न शोषण मिले सम्मान ऐसा तुम संसार बसाओ। हो न… Read More

vishwas

कविता : करते जो खुद पर विश्वास

करते जो खुद पर विश्वास रचते वे ही नया इतिहास… बिना फल की इच्छा करे कर्मों पर हो अटल विश्वास धरती ही नहीं अंबर छू लेने का जिनके मन में बुलंद अहसास रचते वे ही नया इतिहास… छोड़ उम्मीद दूसरों… Read More

diwali

कविता : दीवाली पर मिलेगी

दीप जलाओ तुम सब। करो अंधकार को दूर। रोशनी कर लो मन में। इस दीपाली पर।। घर का कचड़ा साफ करो। मन को करो तुम शुध्द। जग मग कर दो गली मौहल्ले और अपना घर। दिलो में खुशीयाँ भर दो,… Read More