ravan

गीत : रावण को भी सुने

रावण कहता है एक बात मेरी सुन लो। क्यों वर्षो से मुझे यूं जलाये जा रहे हो। फिर भी तुम मुझे जला नहीं पा रहे हो। हर वर्ष जलाते जलाते थक जाओगे। और एक दिन खुद ही जल जाओगे।। मैंने… Read More

dost

ग़ज़ल : तो अच्छा होता

कभी आगे का ख़्याल करते, तो अच्छा होता कभी गुज़रा भी याद करते, तो अच्छा होता उजाड़ने का क्या है उजाड़ दो बस्तियां सारी, कभी तो कुछ आबाद करते, तो अच्छा होता औरों की अमानत को न उड़ाइये यारों में… Read More

titli

कविता : अभी भी वक्त है

ये कैसा दौर है अभी सब दर्द दर्द है, खामोश आँसुओं के मुख विषाद सर्द है। सब जी रहे तड़प-तड़प कुसूर का पता, लगा रहे सभी सम्भल अभी वो लापता। जब मौत नाचती है सिर पे यादें लौटती, किया था… Read More

mahendra book

पुस्तक लोकार्पण: मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ

हंसराज कॉलेज एवं कैम्पस कॉर्नर द्वारा 21 अक्तूबर 2020 को सायं 6.00 बजे नयी किताब प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित मेरे मुक्तक संग्रह ‘मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ…’ का लोकार्पण एवं उस पर चर्चा आयोजित की जा रही है। जिसमें हिंदी… Read More

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कविता : बेरोजगारी की हद

शिक्षित होकर भी देखा घर पर रहकर भी देखा सभी कहते मै बेरोजगार कोई कहता काम करो। शिक्षित घरेलू क्रियाकलापों में असहाय सभी शिक्षित को रोजगार भी नहीं। मजबूर शिक्षित रोजगार की तलाश में गुमसुम जैसा चाहे वैसा नहीं दर… Read More

prem vedna

कविता : प्रेम वेदना

प्रेम वेदना क्या होती है प्रेम करके स्वयं देख लो। कष्ट किसी को भी हो सहन दोनों को पड़ता है। मीरा कृष्ण के प्यार को सुना और पढ़ा होगा। प्रेम में मीरा को जहर पीना पड़ा था और वेदना कृष्ण… Read More

chahat

ग़ज़ल : एक शोर, जी उठा है फिर से

जिगर में एक शोर, जी उठा है फिर से वो गुज़रा, किरदार, जी उठा है फिर से बड़े ही जतन से बाँध कर रखा था इसे, यारों दिल फ़ितरती, जी उठा है फिर से ला पटका है वक़्त ने उसी… Read More

bharat ki beti

कविता : भारत की बेटी

हम भारत की बेटी हैं समझो न किसी से कम पर्वत से ऊंची उड़ान हमारी… हम नहीं घबराती राहें चाहे कितनी भी हों मुश्किल पीछे मुड़कर हम नहीं देखती बस आगे ही बढ़ते जाती हम भारत की बेटी हैं। हम… Read More