mohbbat

नज़्म : मोहब्बत

मोहब्बत के सफर पर चलने वाले रही सुनो मोहब्बत तो हमेशा जज्बातों से की जाती है महज़ शादी किसी मोहब्बत का साहिल नहीं मंज़िल तो दूर बहुत इससे भी दूर जाती है। जिन निगाहों में मुकाम-ए-इश्क़ शादी है उन निगाहों… Read More

ग़ज़ल : यहीं छोड़ जाऊंगा

ये जिस्म, ये लिबास, यहीं छोड़ जाऊंगा जो कुछ है मेरे पास, यहीं छोड़ जाऊंगा जब जाऊंगा तो कोई न जायेगा मेरे साथ सब लोगों को उदास, यहीं छोड़ जाऊंगा भर-भर के जाम जिस में पिए उम्र भर वही ख़ुशियों… Read More

to acha hai

ग़ज़ल : तो अच्छा है

वक़्त मोहब्बत में गुज़र जाये, तो अच्छा है ज़िंदगी कुछ और ठहर जाये, तो अच्छा है न की है तमन्ना ज्यादा खुशियों की हमने, ज़रा सी मुस्कान बिखर जाये, तो अच्छा है दिल धड़कता है जाने किस-किस के वास्ते, मुकद्दर… Read More

naturelove

ग़ज़ल : यहाँ की हवाओं में ज़हर घोलने वाले

यहाँ की हवाओं में ज़हर घोलने वाले। तू गूंगा क्यों हो रहा है सब बोलने वाले॥ तेरे आँसू किसी के गम में क्यों निकलते नहीं। तू क्यों रोता है सियासत के पर खोलने वाले॥ चैन की ज़िन्दगी थी एक, उसको… Read More

izahar

ग़ज़ल : अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है

अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है दिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है इशारा तो करो मुझको कभी अपनी निगाहों से अगर है इश्क़ मुझसे तो जताना भी ज़रूरी है अगर कर ले सभी ये… Read More

samundr

ग़ज़ल : अपनों को दूर मत करिये

किसी की रूह को इतना भी, चूर मत करिये इंसान हो कर भी हैवां सा, कसूर मत करिये अच्छा हो अपने कद का भी, अंदाज़ कर लो, देख अपना ही लम्बा साया, गुरूर मत करिये यारा समझ कर कि, अब… Read More

duri

ग़ज़ल : अरकान

दूर मुझसे न जा, वरना मर जाऊँगा। धीरे-धीरे सही, मैं सुधर जाऊँगा।। बाद मरने के भी, मैं रहूंगा तेरा। चर्चा होगी यही, जिस डगर जाऊँगा।। मेरा दिल आईना है, न तोड़ो इसे। गर ये टूटा तो फिर, मैं बिखर जाऊँगा।।… Read More

watan(1)

ग़ज़ल : वतन का खाकर जवाँ हुए

वतन का खाकर जवाँ हुए हैं वतन की खातिर कटेगी गर्दन। है कर्ज हम पर वतन का जितना अदा करेंगे लुटा के जाँ तन।। हर एक क़तरा निचोड़ डालो  बदल दो रंगत वतन की यारो। जहाँ  गिरेगा   लहू   हमारा   वहीं … Read More

waiting(1)

ग़ज़ल : मेरा गम तो छुपा है आंखो में

मेरा गम तो छुपा है आंखो में एक तू ही तो है निगाहों में।। अब मेरा इम्तिहान मत लेना जिसके ख्वाबों से दूर रहती हूं, दरअसल वो ही ख़्वाब है तु मेरा।। देख क्या इंतखाब है मेरा लब पे मैने… Read More

man(1)

ग़ज़ल : कभी ख्वाहिशों ने, फंसाया ज़िन्दगी को

कभी ख्वाहिशों ने, फंसाया ज़िन्दगी को ! तो कभी ज़रूरतों ने, रुलाया ज़िंदगी को ! कभी राह में गैरों ने बिछाए कांटे दोस्तो, तो कभी अपनों ने, छकाया ज़िन्दगी को ! कभी ख्वाबों में खुश हो लिए हम यूं ही,… Read More