neelkanth

कविता : विजयदशमी और नीलकंठ

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे, समुद्र मंथन से निकले विष का पान भोले शंकर ने किया था इसीलिए कंठ उनका नीला पड़… Read More

ram aur ravan

कविता : राम और रावण

रावण न होते तो राम भी कहाँ होते राजकुमार राम तो होते लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम नहीं होते ! धर्म की विजय नहीं होती चक्रवर्ती सम्राट भले होते रावण राम की पहचान हुए मर्यादा की तरफ प्रस्थान हुए माता सीता… Read More

use and throw

लघुकथा : यूज एंड थ्रो

“अदिति! आओ लंच करें।” मिली ने टिफिन खोलते हुए कहा। “नो डियर, तुम कर लो, मुझे भूख नहीं है।” अदिति ने विंडो से बाहर देखते हुए कहा। “व्हाट डू यू मीन, भूख नहीं है।”…. क्या बात है दिवाकर, अभी भी… Read More

ram

लघुकथा : रावण में भी राम

रामलीला का आयोजन चल रहा था। दृश्य था “सीता – हरण”। पंडाल भरा हुआ था। आयोजकों ने महिलाओं और पुरुषों के लिए बैठने की व्यवस्था, सुविधा और सुरक्षा की दृष्टि से अलग-अलग की थी। सभी लोग लीला का आनंद ले… Read More

nari

लेख : नारी, माया या देवी

नवरात्रि में दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली शक्ति रूपा स्त्री आज अधिकांश रूप में बेबस और लाचार नजर आती है। नारी का रूप बदला है, किन्तु नारी के प्रति संकीर्ण अवधारणाएं आज भी नहीं बदली है। आज भी… Read More

maan ki aaradhana

कविता : माँ की आराधना

करे जो सच्चे मन से माँ की आराधना। मिले उसे ही दर्शन माता रानी का। इसलिए तो भक्त जन करते है माँ की उपासना। और पा जाते है अपने जीवन में सब कुछ।। जो माँ को दिल से याद करते… Read More

mata rani

कविता : मातारानी को पूजे

करे जो पूजा और भक्ति नवरात्रि के दिनों में। और करते है साधना माता की उपासना करके। तो मिलता है सूकून उसे अपने जीवन में। और हो जाती इच्छाएं उसकी इन दिनों में पूरी।। माता के नौ रूपों को जो… Read More

suraj

कविता : जिद ने हमको सूरज बनाया है

जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका जमानेके इशारे से जो अपना हर कदम बढ़ाओगे मानो बात या न मानो मगर तुम फिसल जाओगे जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका तुम्हारी रफ्तार से पीछे रहता है तो ये खीझता… Read More

navratra

नवरात्र-शक्ति-आराधना

(सर्व अमंगल, मंगलकारी, दुःख-पीड़ा से तारण हारी। जग-तम में तू ही उजियारी, जीव कंटको में फुलवारी। अब तो आजा, हे जग माँ तू, यह दुनियाँ तुझ ही को पुकारी।)… 2 स्मरण तेरा शुरू करें हम, घट को स्थापित करके। घट-घट… Read More

pariwar

कविता : ऐसा भी होगा

ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा, परिवार बिखर ही नहीं रहे मोह,ममता भी जैसे मर रहे संवेदनाएं जैसे दम तोड़ रही हैं परिवारों में भी किसी को किसी की फिक्र ही नहीं है। हर रिश्ता स्वार्थ… Read More