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साहित्य समाज का दर्पण है तो सिनेमा उसका नया अवतार है। साहित्य के बिना सिनेमा अधूरा है। सिनेमा की शुरुआत ही साहित्य से होती है। साहित्य की धरा को सिनेमा बहुआयामी विस्तार देता है। साहित्य, सिनेमा का रूप लेकर उनसे भी संवाद करता है जहाँ साहित्य का मर्म ही नहीं पहुँच पाता।

वास्तव में साहित्य और सिनेमा दोनों ने ही अपने शुरुआती दौर से ही समाज को जोड़ने का काम किया है। साहित्य और सिनेमा के इसी सोच को लेकर उसके हर पहलुओं पर नज़र रखने के लिए ‘साहित्य सिनेमा सेतु’ का यह वेब पोर्टल हाज़िर है। जो रील से रियल लाइफ तक सबकी ख़बर रखता है। ब्लैक एंड व्हाइट के दौर से लेकर रंगीन होती दुनिया की कही अनकही सारी बातों को कवर भी करता है। जहाँ साहित्य में इसकी सभी विधाओं- कविता, कहानी, यात्रा वृतांत, डायरी, रेखाचित्र, संस्मरण, आत्मकथा, जीवनी, रिपोर्ताज़, अनुवाद आदि को स्थान देता हैं। वहीं सिनेमा के विभिन्न रूपों- वेब सीरीज, सीरियल्स, शॉर्ट फिल्म्स, और डाक्यूमेंटरी आदि विषयों पर भी अपनी पैनी नज़र रखता है। साहित्य और सिनेमा के साथ-साथ इसको प्रभावित करने वाले कारकों समाज, शिक्षा, कला एवं संस्कृति आदि सबकी समसामयिक घटनाओं व ज्वलंत मुद्दों से भी रूबरू कराता है। साथ ही उभरते हुए युवा कलाकारों के लिए एक मंच प्लेटफॉर्म प्रदान करता है, जिससे वे अपने हुनर (राईटिंग स्किल, डांस, सिंगिंग, एक्टिंग, म्यूजिक, आर्ट, फोटोग्राफी, मॉडलिंग, स्केचिंग आदि) का प्रदर्शन कर सकें।

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