pro chauthiram

भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रो. चौथीराम यादव

प्रसिद्ध चिंतक और लोकधर्मी आलोचक प्रोफेसर चौथीराम यादव के स्मृति में आज एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रवींद्रपुरी स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ला शोध संस्थान में किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ दलित साहित्यकार श्री जवाहरलाल कौल ‘व्यग्र’ ने किया। शोक सभा… Read More

savarkar

पुस्तक समीक्षा : सावरकर की चिंतन-दृष्टि

इतिहास के पन्नों में विनायक दामोदर सावरकर का नाम भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में काफी चर्चा का विषय रहा है। राजनीतिक दलों ने अपने अपने अनुसार वीर सावरकर को समझने का प्रयास किया है। किसी ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक… Read More

holi

कविता : होली आई

आओ हम सब, मिलकर मनायें होली। अपनो को स्नेह प्यार का, लगाये रंग हम। चारों ओर होली का रंग, और है अपने संग। तो क्यों न एकदूजे को, लगाये हम रंग। आओ मिलकर मनायें, रंगो की होली हम।। राधा का… Read More

radhe krishna

गीत : मैं किशना हो जाऊँ पिया

ऐसा रंग दे मोहे रँगरेज़ा, वृन्दावन हो जाऊँ पिया तू बन जाये राधा रानी, मैं किशना हो जाऊँ पिया। होली खेलें किशन मुरारी, भर भर मारें रंग पिचकारी सूखी देह रही ये सारी, भींग गयी सिगरी अँगियारी बाँह पकड़ के… Read More

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गीत : महाशिवरात्रि

भुजंग, शशांक, त्रिशूल, शंख जटा विचरती पवित्र गंग व्याघ्र खाल पहन मलंग धतूरा दुग्ध वेलपत्र भंग विराज नन्दी गणादि संग तुरही नाद डमरू मृदंग रुद्राक्ष कण्ठ हार पहन। शिव चले यक्षदेव भुवन।। त्रियोदशी शिव ब्याह करन महादेव चले गौरा वरन… Read More

aurat

ग़ज़ल : औरत

उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा शख्सियत औरत ही रही प्यार बदलता रहा। बहिन, बेटी, बीबी, माँ, न जाने क्या क्या चेहरा औरत का दहर हर बार बदलता रहा। हालात ख्वादिनों के कई सदियां न बदल पाईं बस सदियाँ बदलती रहीं, संसार बदलता रहा।… Read More

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‘स्त्री संघर्ष का सिलसिला : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आज उदय प्रताप कॉलेज के हिंदी विभाग एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्त्री संघर्ष का सिलसिला : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’ विषय पर विज्ञान भवन के कक्ष संख्या 15 में एक संगोष्ठी… Read More

gumshuda hansi

कविता : गुमशुदा हँसी

चेतना पारीक के कलकत्ते में किसी तलाश में आया हूँ मैं, काफी सुना था कि ये आनन्द और प्रेम की नगरिया है, उसी मृग-मरीचिका की तलाश का पर्याय है चेतना पारीक, चेतना पारीक जब होती भी तब भी वह गुमशुदा… Read More

sant sahitya

शोध लेख : समकालीन जीवन में संत साहित्य की प्रासंगिकता

प्रस्तावना : निर्गुण भक्तिधारा के कवियों को ‘संत’ शब्द से संबोधित किया गया है। अपने हित के साथ जो लोक कल्याण की भी चिंतन करता है, वही संत कहलाने का अधिकारी है। इन संतों द्वारा बताये गये विचार तत्कालीन समाज… Read More