manusy

व्यंग्य : मठहाउस

प्रश्न – हिंदी साहित्य के वर्तमान परिवेश में मठ और मठाधीशों की क्या स्थिति है ? उत्तर- हिंदी साहित्य इस समय मठ और मठाधीशों के कम्रिक रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है । कोरोना काल में यात्रा करने की… Read More

ott

लेख : सेक़ुअल के भरोसे ओटीटी

ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत जब देश में हुई तो किसी को इतना अंदाजा नहीं था कि यह अपनी पकड़ भारतीय दर्शकों पर इतनी ज्यादा बना देगा ।शुरुआती वेब सीरीज को देखकर लगा कि बस कुछ एक कंटेंट ऐसे हैं जिन्हें… Read More

juba kesari

व्यंग्य : बोलो जुबां केसरी

बोलो जुबाँ केसरी (व्यंग्य) ‘कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उसको भाते होंगे “ जी हाँ उसको गुटखा बहुत भाता था ,वो गुटखे के बिना न तो रह सकता था और न… Read More

mansikta

लेख : मानसिकता

पद्मा इन दिनों बहुत परेशान थी। पढ़ाई के साथ साथ साहित्य में अपना अलग मुकाम बनाने का सपना रंग ला रहा था। स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर तक उसकी रचनाएं प्रकाशित हो रही थीं। जिसके फलस्वरूप उसे विभिन्न आयोजनों… Read More

jatayuu

कविता : स्त्री का रक्षक

भावनाओं की उत्कृष्टता का, आदर्शवादिता का, प्रेम – समर्पण का समुद्र भरता है दिव्य ग्रंथ रामायण महकाव्य गढ़ता है।। एक बूढ़ा पक्षी एक स्त्री की रक्षा करता है, उम्र से हारा जटायू भी एक विचार करता है, तू काहे इस… Read More

girlalone

लेख : एक थी श्रद्धा

एक थी श्रद्धा माता-पिता दुलारी गई भटक रिश्ता भी धोखा दिल टूटा श्रद्धा का केवल पीड़ा ना वो आजादी मां-बाप बिन शादी गत श्रद्धा की ना प्रेम पला ना रहा लिव-इन जग-हसाई न रहा प्यार केवल व्यभिचार श्रद्धा व ताब… Read More

mosam

कविता : विकलांग नहीं दिव्यांग है हम

आँखे अँधी है, कान है बहरे , हाथ पांव भी भले विकल । वाणी-बुद्धि में बनी दुर्बलता , विश्वास-हौसला सदा अटल । अक्षमताओं से क्षमता पैदा कर , विकलांग से हम दिव्यांग कहाए । परिस्थितियों से लोहा लेकर ही ,… Read More

brother-sister

कहानी : अपनापन

पिछले दिनों कवि/साहित्यकार रिशु अपने मित्र लवलेश के घर गया। यूँ तो दोनों का एक दूसरे के घर काफी पहले से आना जाना था। मगर लवलेश की शादी में रिशु अपने एक पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में जाने की… Read More

mahua

लेख : महुआ

‘महुआ’ शब्द में ही मिठास है।इस विषय पर सोचने और लिखने से आँखों में खुदबखुद चमक आ जाती है।यह शब्द हमारे इतिहास,संस्कृति और हमारी परंपराओं से जुड़ा हुआ है।वैदिक काल से लेकर अभी तक महुआ के फूल,फल और पेड़ की… Read More

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कविता : अभिमान के कारण

मान अभिमान के कारण में, उजड़ गए न जाने कितने घर। हँसते खिल खिलाते परिवार, चढ़ गये इसकी भेंट। फिर न मान मिला, न ही सम्मान मिला। पर आ गया अभिमान, जिसके कारण रूठ गये परिवार।। हमें न मान चाहिए,… Read More