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कविता : बदलता परिवेश

विकासशील देशों की तर्ज पर कभी उम्र का विस्तार नहीं होता इसके चलते बुजुर्गो का सम्मान नहीं होता।। प्रशिक्षित चिकित्सा ही विकल्प नहीं स्वास्थ के लिए जागरूकता का अभियान भी होगा अब तो अपनी जीवनशैली को बदलना होगा आगे आकर… Read More

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स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है । हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे । अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर… Read More

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पुस्तक लोकार्पण: मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ

हंसराज कॉलेज एवं कैम्पस कॉर्नर द्वारा 21 अक्तूबर 2020 को सायं 6.00 बजे नयी किताब प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित मेरे मुक्तक संग्रह ‘मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ…’ का लोकार्पण एवं उस पर चर्चा आयोजित की जा रही है। जिसमें हिंदी… Read More

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शोध लेख : नारी संघर्ष की गाथा ‘नक्काशीदार केबिनेट’

प्रवासी साहित्यकारों में सुधा ओम ढींगरा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। सुधा ओम ढींगरा का साहित्य दो संस्कृतियों पर आधारित होने के कारण उनके साहित्य की मूल संवेदना प्रवासी न होकर ‘अन्त: सांस्कृतिक’ पर आधारित हैं। भारतीय… Read More

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कविता : आत्माओं का सम्बन्ध

दो सम्बंधित आत्माएँ … क्या अलग हो सकती हैं? कुछ लम्हों के अलगाव से… जो जुड़ी है, एक दूसरे के भाव से उन्हें मुक्त रहने दो उन्हें महसूस करने दो उन्हें प्रेम की परिभाषा गढ़ने दो उन्हें रचने दो, एक… Read More

Rahat Indori

मशहूर शायर व गीतकार राहत इंदौरी को अंतिम सलाम

साइनबोर्ड पेंटर से टॉप सांग राइटर तक राहत इंदौरी कोई व्यक्ति अपनी मेहनत, प्रतिभा और हौसले से अपनी हैसियत कैसे बदल सकता है उसका एक बेहतरीन उदाहरण गीतकार डॉ. राहत इंदौरी हैं। वे एक साइनबोर्ड पेंटर से कॉलेज के अध्यापक… Read More

nai kitab publication athrva me wahi van hu

पुस्तक समीक्षा : अथर्वा मैं वही वन हूँ

पुस्तक : अथर्वा मैं वही वन हूँ लेखक : आनंद कुमार सिंह प्रकाशक : नयी किताब प्रकाशन, दिल्ली समीक्षक : विनोद शाही मानव जाति का भविष्य कविता में है “अपरा विज्ञानों के महाविकास के फलस्वरूप यहाँ पर गद्यदेश का विकास… Read More

Ravindranath Tagore

गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्य तिथि पर सादर नमन के साथ मनहरण छंद

(01) आन बान शान वाला, नोबेल वे साहित्य का, पाने वाले एशिया के, प्रथम सपूत थे। नाम था रवीन्द्रनाथ, गुरुदेव लोग जिन्हें, कहा करते थे सभी, भारती के पूत थे।। भारतीय सांस्कृतिक चेतना जगाने वाले, रखते थे ज्ञान की वे… Read More