Review Book 'Panchayat'

समीक्षा : पुस्तक ‘पंचायत’

गाँव, गरीबी, किसान, खेतीबाड़ी और ग्रामीण जीवन की दुश्वारियाँ, स्त्रियों की विडंबनाएँ, उनके पहाड़ों से दर्द, सामंती सोच के प्रेतों की क्रूरताएँ व करगुजारियों आदि विसंगतियों – विद्रूपताओं को ध्वस्त करने की अदम्य जिजीविषा लेकर आई है युवा लेखक कुशराज… Read More

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व्यंग्य: कुदरत का निजाम

पाकिस्तान की एक रिपोर्टर कुदरत बलोच ने वहां के निवर्तमान कप्तान बाबर आजम से पूछा – “ अब आप कप्तान नहीं रहे, ये कैसा कुदरत का निजाम है “ ? बाबर – “देखें जी कुदरत ये निजाम नहीं आजम है।… Read More

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गदर : जब दर्शकों ने किया समीक्षकों का मुँह बंद

गदर पार्ट 1 को जब अधिकतर तथाकथित फ़िल्मी विद्वान समीक्षकों ने गटर बताया था, तब भी दर्शकों ने इस फ़िल्म को हिंदी सिनेमा के कालजयी फिल्मों के क्लब में शामिल कराकर उनका मुँह ऐसा बंद किया कि बेचारे वो करें… Read More

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शोध आलेख : ‘गदर की चिनगारियाँ’ नाटक-संग्रह में चित्रित नारी सशक्तीकरण

नारी-सशक्तीकरण समय की आवाज़ भी है और माँग भी। इसे नारी-विमर्श का क्रियात्मक रूप कह सकते हैं। यह एक सामाजिक उपक्रम ही कहा जाएगा। कहीं-कहीं इसके लिए नारी सबलीकरण पद का भी प्रयोग होता है। इसका विशेष प्रयोग प्रशासनिक और… Read More

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चंद्रयान-3

भारत ने आज चांद पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर इतिहास रच दिया है. इसरो की इस उपलब्धि पर साहित्य सिनेमा सेतु परिवार की तरफ से हार्दिक बधाई। +3-2

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लेख : स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है। हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे। अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर हावी हो… Read More

काश! ग़ालिब ने रटौल खाया होता

“फल कोई ज़माने में नहीं, आम से बेहतर करता है सना आम की, ग़ालिब सा सुखनवर इकबाल का एक शेर, कसीदे के बराबर छिलकों पे भिनक लेते हैं, साग़र से फटीचर वो लोग जो आमों का मज़ा, पाए हुए हैं… Read More

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लेख : पूर्वोत्तर भारत के छात्र-छात्राओं का समूह देश के बाकी हिस्से में भ्रमण पर

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश भर में छात्रों के हितों की बात करता रहा है। परिषद लगातार छात्र हितों के लिए प्रयासरत है। विद्यार्थी परिषद का मुख्य उद्देश्य समाज में सामाजिक सौहार्द तथा भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत… Read More

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व्यंग्य : मठहाउस

प्रश्न – हिंदी साहित्य के वर्तमान परिवेश में मठ और मठाधीशों की क्या स्थिति है ? उत्तर- हिंदी साहित्य इस समय मठ और मठाधीशों के कम्रिक रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है । कोरोना काल में यात्रा करने की… Read More

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लेख : सीक्वल के भरोसे ओटीटी

ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत जब देश में हुई तो किसी को इतना अंदाजा नहीं था कि यह अपनी पकड़ भारतीय दर्शकों पर इतनी ज्यादा बना देगा ।शुरुआती वेब सीरीज को देखकर लगा कि बस कुछ एक कंटेंट ऐसे हैं जिन्हें… Read More