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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश भर में छात्रों के हितों की बात करता रहा है। परिषद
लगातार छात्र हितों के लिए प्रयासरत है। विद्यार्थी परिषद का मुख्य उद्देश्य समाज में
सामाजिक सौहार्द तथा भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। भारत विविधताओं की
भूमि है। यह विविधता भाषाई, भौगोलिक, धार्मिक, तथा सांस्कृतिक रूप में विद्यमान है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक एक उपक्रम SEIL (Student’s Experience in
Inter State Living)। आम बोल-चाल में इसे सील कहा जाता है। SEIL के माध्यम से
पूर्वोत्तर भारत के छात्र-छात्राएँ देश भर में भ्रमण करते हैं। यह भ्रमण सामान्य भ्रमण से थोड़ा
सा हटकर होता है। सामान्यत: जब कोई घूमने जाता है, तो होटल लाना व गाईड की मदद लेते
हैं, सही अर्थों में कहें तो बाजार जो दिखाना चाहता है ज्यातर हम वही देख पाते हैं। इस कारण
अब हम कहीं घूमने जाते हैं तो बहुत जानकारियों से हम अछूते रह जाते हैं। सील के माध्यम से
यह छात्र देश के बाकि राज्यों में जाते हैं। रूकने के लिए होटल के बजाए किसी घर का चयन
किया जाता है। दूसरे राज्यों से आए छात्र भारतीयता में विविधता में रची-बसी विविधता को
बहुत करीब से जान पाते हैं। जब हम किसी समाज के साथ कुछ समय तक साथ रहते हैं, तब
हम जिस समाज के प्रत्यक्ष सहभागी हैं। तब हम उस समाज के ताने-बाने साथ ही उस समाज के
व्याकरण को भी हम बहुत गहनता से जान पाते हैं। भारत विविधताओं के संसार की राजधानी
है। इन विविधताओं के कारण कई बार गलतफहमियाँ भी पनपती हैं। इन गलत फहमियों को
हम अक्सर सुनते रहते हैं कि नॉर्थईस्ट अथवा भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से में ऐसा होता है, ठीक
इसी तरह पूर्वोत्तर भारत के समाज में भी बाकी भारत के समाज को लेकर हो सकता है कोई
पूर्वाग्रह हो। इन पूर्वाग्रहों को दूर करने तथा भविष्य में कोई गलत अथवा जिसका वास्तविकता
से लेना देना न हो व विचार न पनपने पाए। सील के माध्यम से मात्र भ्रमण ही नहीं होता है
बल्कि जीवन भर के लिए रिश्ते बनते हैं। व्यक्ति का जीवन बहुआयामी होता है, हम हर आयाम
में समृद्ध अथवा पूर्ण रूप से खुश नहीं हो सकते हैं। मसलन किसी व्यक्ति के परिवार में दादा-
दादी अथवा नाना-नानी का अभाव है, वे छात्र भी इस भ्रमण के माध्यम से इन रिश्तों के
वात्सल्य को समझ पाते हैं, ठीक इसी तरह कई बार मेजबान परिवार को भी परिवार के व्यक्ति
होने का एहसास होता है। यह अक्सर होता है जब अतीथि के जाने का समय करीब आता है
और परिवार को भी लगता है कि अब आतिथ्य सत्कार के दिन पूरे हुए तब दोनों ओर के लोग
आँसू बहा रहे होते हैं। हम इस कारण से भी भली-भांति परिचित हैं की भारत में भौगोलिक
विभिन्नता व उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम में बहुत दूरी है, सील-भ्रमण के माध्यम से यह

सब बहुत आसानी से हो पाता है। सील भ्रमण के माध्यम से इन छात्रों को स राज्य के खान-
पान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व महत्वपूर्ण स्थानों को जान पाते हैं, राज्य के महत्वपूर्ण व्यक्तियों से
सील के इस दल की मुलाकात भी करवाई जाती है, जैसे की प्रशासनिक अधिकारी, राज-भवन,
मुख्यमंत्री आदि। भारत की सांसकृतिक विविधता में सील का कार्यक्रम एक पावन प्रयाग जैसा
है, जहाँ तमाम संस्कृतियों के लोग एक दूसरे को समझ पाते हैं। देश के एकीकरण को मजबूत
करने के लिए इस कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है।

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