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durgama

कविता : पूजो मातारानी को

करे जो पूजा और भक्ति नवरात्रि के दिनों में। और करते है माता की साधना और उपासना। तो मिलता है उन्हें सूकून अपने जीवन में। और हो जाती पूरी उनकी इच्छाएं इन दिनों में।। माता के नौ रूपों को जो… Read More

navratrii

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। जय माता दी। इस नवरात्रि मां दुर्गा आपको सुख समृद्धि वैभव और ख्याति प्रदान करें। 00

navratriprav

कविता : माँ के रूप अनेक

मन मंदिर में आन विराजो मेंहर वाली मातारानी। दर्शन की अभिलाषा लेकर आ गये हम मेंहर में। तुमको अपने दर्शन देने बुला लो हमें मंदिर में। हम तो तेरे बच्चे है काहे घूमा रही हो दुनिया में।। कितने वर्षो से… Read More

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गीत : पितृ दिवस में संकल्प ले…

पितृ दिवस चल रहे है तो करो एक नेक काम। लेकर अपने पूर्वजो के नाम गोद ले लो एक गौ माता को। और दे दो उस एक अभय दान सफल हो जायेंगे ये पितृ दिवस। और तभी मिल जायेगी उनकी… Read More

manjur

व्यंग्य : यक्ष इन पुस्तक मेला

दिल्ली का पुस्तक मेला समाप्त हो चुका था ,धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के अलावा इंद्रप्रस्थ के भी सम्राट थे ।अचानक यक्ष प्रकट हुए ,उन्होंने सोचा कि चलकर देखा जाये कि धर्मराज अभी भी वैसे हैं या बदल गए जैसे कि मेरे… Read More

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कविता : अपनी उलझने

न मन पढ़ने में लगता है न दिल लिखने को कहता है। मगर विचारो में सदा ये उलझा सा रहता है। करू तो क्या करू अब मैं समझ में कुछ नहीं आ रहा। इसलिए तो हमारा दिल अब एकाकी सा… Read More

insaff

कविता : अब अजस्र इंसाफ होगा

इंतजार बस इंतजार , राम का ही बस इंतजार । बढ़ रहा है ,बढ़ रहा है, हर ओर रावण अत्याचार। सह रहे हैं, सह रहे हैं, मुंह से कुछ ना कह रहे हैं । घाव जो फोड़े बने हैं ,… Read More

jhnda

गीत : झंडा ऊँचा हमारा है……

दिल में प्यार तुम्हारा है ,भारत को तू प्यारा है । झंडा ऊँचा हमारा है ,जग में सबसे ही न्यारा है ।। तीन रंग लिए फहरा करता , आंधी तूफां से नहीँ डरता । समय का पहिया आगे बढ़ता ,… Read More

kalm

कविता : क्यों करता हूँ कागज काले..??

क्यों करता हूं कागज काले …?? बैठा एक दिन सोच कर यूं ही , शब्दों को बस पकड़े और उछाले । आसमान यह कितना विस्तृत ..? क्या इस पर लिख पाऊंगा ? जर्रा हूं मैं इस माटी का, माटी में… Read More

narisakti

कविता : नारी को जाने और समझे

दिखाये आँखें वो हमें जब मनका काम न हो उसका। तब बहाना ढूँढती रही हमें शर्मीदा करने का। यदि इस दौरान कुछ उससे पूछ लिया तुमने। तो समझ लो तुम्हारी अब खैर नहीं है।। अलग अलग तरह के रूप देखने… Read More