gulami

कविता : गुलामी

हम जात पात में पड़े रहेंगे। और देश को बर्बाद करेंगे। दूसरे देश प्रगति को चुनेंगे। और विश्व में पहचान बनाएंगे।। गये थे जब अंग्रेज देश से तो जाति का बीज वो गये थे। जिससे आपसी भाई चारा देश में… Read More

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कविता : अन्नदाता किसान

अन्नदाता होकर भी ख़ुद पानी पीकर अपना भूख मिटाएँ पर जग को भूखा न सोने दे ऐसे अन्नदाता किसान हमारे… चाहे आँधी आये या तूफ़ान चिमिलाती धूप हो या कड़ाके की ठण्ड मेहनत करने से यह नहीं घबराते बच्चे समान… Read More

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कविता : मकर संक्रांति आई है

मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई है निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें हैं जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई है मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई… Read More

2021

कविता : नव वर्ष 2021 दे आपको…

करे न कोई गम अब जाते हुए 2020 का। जो बीता सो बीता अब गुजर गया साल। सीखा गया जाते जाते लोगों के दिल में प्रेमभाव। नहीं आया विपत्ति में धन-दौलत अब की बार। भूला कर अपने सारे गम करें… Read More

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कविता : करते जो खुद पर विश्वास

करते जो खुद पर विश्वास रचते वे ही नया इतिहास… बिना फल की इच्छा करे कर्मों पर हो अटल विश्वास धरती ही नहीं अंबर छू लेने का जिनके मन में बुलंद अहसास रचते वे ही नया इतिहास… छोड़ उम्मीद दूसरों… Read More

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कविता : प्रकाश पर्व

करो प्रकाशित घर आँगन दुनिया से तम दूर भगाओ पहले सब को खुशियां बांटो फिर अपने घर दीप जलाओ अपने मन को निर्मल कर लो यारा लोभ मोह सब दूर करो बस करो मदद एक दूजे की दिल से दिल… Read More

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कविता : पहचान

हृदय में करुणा भर कर सबका सम्मान रूप और यौवन पर मत कर अभिमान परिश्रम से ही होता हर स्वप्न साकार ईर्ष्या और घृणा से मिलता नहीं प्यार ज्ञान से ही संभव है मनुज का उत्थान कर्मों से ही बनती… Read More

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पुस्तक लोकार्पण: मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ

हंसराज कॉलेज एवं कैम्पस कॉर्नर द्वारा 21 अक्तूबर 2020 को सायं 6.00 बजे नयी किताब प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित मेरे मुक्तक संग्रह ‘मैं ऐसा वैसा नहीं हूँ…’ का लोकार्पण एवं उस पर चर्चा आयोजित की जा रही है। जिसमें हिंदी… Read More

chahat

ग़ज़ल : एक शोर, जी उठा है फिर से

जिगर में एक शोर, जी उठा है फिर से वो गुज़रा, किरदार, जी उठा है फिर से बड़े ही जतन से बाँध कर रखा था इसे, यारों दिल फ़ितरती, जी उठा है फिर से ला पटका है वक़्त ने उसी… Read More