ram aur ravan

कविता : राम और रावण

रावण न होते तो राम भी कहाँ होते राजकुमार राम तो होते लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम नहीं होते ! धर्म की विजय नहीं होती चक्रवर्ती सम्राट भले होते रावण राम की पहचान हुए मर्यादा की तरफ प्रस्थान हुए माता सीता… Read More

zindgi abhi aur bhi hai

लेख : ज़िदगी अभी और भी है…

तमाम संघर्षों के बीच भी ज़िदगी होती है। जब हम निराश, हताश और संघर्षों से टूटने लगते हैं तब कभी कभी लगता है कि जीवन बस हमारा इतना ही था। जीवन की शेष संभावनाएं स्वतः खारिज हो जाती है। ऐसे… Read More

khamoshi

लेख : खामोशियाँ

खामोशी हृदय की एक अवस्था और परिस्थिति की एक मांग भी होती है। कभी कभी खामोशी वो भी कह देती जो शोर नहीं कह पाता। खामोशियों की भी अपनी जबान होती है जो हर किसी को समझ नहीं आती। कभी… Read More

swatantrata

स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है । हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे । अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर… Read More

sohar geet

भोजपुरी लोक गीत परम्परा में अगली कड़ी सोहर गीत

भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र अर्थात उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और बिहार के लगभग आधे हिस्से में तरह-तरह के गीतों का प्रचलन देखने को मिलता है, इन्हीं गीतों में से एक गीत सोहर भी है । कुछ लोग परिचित होंगे कि यह… Read More

man alone and thinking

सही और ग़लत के बीच

सही और ग़लत के बीच भी बहुत कुछ ऐसा होता जिससे परिस्थितियों का निर्माण होता है । सही कोई क्यो है ? जितना महत्वपूर्ण यह प्रश्न है उतना ही महत्वपूर्ण इसका जवाब भी तलाशना होता है कि कोई गलत क्यों… Read More

indian class room

नई शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा में मातृभाषा विषयक अवधारणा के निहितार्थ

नई शिक्षा नीति में बहुत से परिवर्तन लक्षित होते हैं । यह परिवर्तन समय की मांग भी थी क्योंकि 1986 के उपरांत बहुत सी स्थितियां बदली है जिससे हमारे शिक्षा नीति में भी परिवर्तन की मांग मुखर होने लगी थी… Read More

ayodhya ram mandir bhumi poojan

मेरे राम आ रहे हैं अयोध्या पुरी में

जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि उत्तर दिसि बह सरजू पावनि। जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा मम समीप नर पावहिं बासा।। ऐतिहासिक होगा। कल का दिन। इस राष्ट्र के इतिहास में प्रभु श्री राम। हिन्दू धर्म के आधार स्तंभ हैं। कितने वर्षों… Read More

kajari song

भोजपुरी भाषी और समाज के लोग में एक खास तरह का गीत “कजरी”

मिर्जापुर, बनारस से लेकर समूचे पूर्वांचल और बिहार के कुछ हिस्सों में जो भोजपुरी भाषी और समाज के लोग है उनमें एक खास तरह के गीत की परम्परा देखने को मिलती है, जिसे कजरी कहा जाता और यह विशेषतः सावन… Read More

sawan ka geet kajari

एक बड़े समाज का प्रतिनिधित्व करती है “कजरी”

कजरी हमें भोजपुरी भाषा परम्परा से विरासत में मिली एक मधुर गीत है। यह गीत विशेष रूप से सावन महीने में गाया जाता है । सावन भी फाल्गुन की तरह उल्लास और उछाह का महीना होता है । जिस प्रकार… Read More