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“तुम्हारा अहसान रहेगा हमपर भोला ।” सामने सोफे पर बैठे शख्स से एक नवजात बच्चे को गोद में लेते हुए वो महिला बोली ।

इस पर भोला कुछ बोलना तो चाहता था लेकिन बोल उसके गले में ही अटक कर रह गए । वो इस बात के जवाब में सिर्फ पीड़ा सनी मुस्कान मुस्कुरा कर रह गया

“सच में भोला तुम बहुत दयालू हो । हमें तो लगा था कि अब हमारे घर में कभी बच्चे की किलकारियां गूंजेंगी ही नहीं मगर तुमने तो खुशियों को हमारे घर का रास्ता दिखा दिया ।” महिला के बगल में बैठा एक व्यक्ति बोला । ये उस महिला का पति था ।

“अईसा ना कहें मालिक । ई पैदा भी तो आप ही लोग के कारन हुआ है नहीं तो ई भी…” भोला इससे आगे कुछ नहीं बोला, बस ज़मीन पर लगे चमकदार पत्थर में उभर रही अपनी शक्ल देखता रहा ।

नन्हा सा वो नवजात बच्चा इन सब बातों से अनजान था कि अखिर उसके साथ ये हो क्या रहा है । भोला की बात के बाद कमरे में सन्नाटा छा गया । इस सन्नाटे को तोड़ते हुए भोला ने अपनी बात फिर से शुरु की “धन्यबाद तो हमको कहना चाहिए मालकिन जो आप हम गरीब के बच्चा को अपना मान लीं । बाकी कौन सा हम अपना बच्चा आपको मुफ्ते में दे रहे हैं ।” इस बात के बाद भोला खुद को संभाल ना पाया और एक दम से फूट पड़ा ।

“ऐसा कह कर हमें शर्मिंदा ना करो भोला । हम यहां बच्चे का सौदा नहीं कर रहे । ये पैसे तो हमारी तरफ से सिर्फ मदद के लिए हैं । बाक़ी इस पर हमेशा तुम्हारा बराबर का हक़ रहेगा । कभी भी इससे मिलने आ सकते हो ।” इतना कहते हुए महिला ने बिना किसी की नज़रों में आए बच्चे पर अपनी पकड़ थोड़ी मजबूत कर ली । भोला दुनियादारी से अच्छी तरह वाकिफ़ था । इसिलिए तो वो इस बात पर मुस्कुरा दिया ।

इन बातों के बीच रीमा सबके लिए चाय ले आई । उसने एक बार असहाय नज़रों से भोला का देखा फिर सबकी तरफ चाय के कप बढ़ाने लगी । भोला अभी भी खुद को चमकदार फर्श में देख रहा था । शायद वो खुद से नज़रें मिलाने की कोशिश कर रहा था । मालिक ने उसे टोका “भोला तुम चाय पीयो मैं तब तक पैसे लेकर आता हूं ।” इतना कह कर वह अंदर चले गए ।

भोला ने एक दफा नज़र उठाई और रीमा की तरफ देखा । रीमा भोला की बहन जैसी थी । सात साल से दोनों साथ थे । भोला के ही एक मित्र की दूर की बहन थी । जब मित्र ने रीमा को काम दिलाने की विनती की थी तब भोला ने ही साहब से कह कर उसे काम दिलवाया था । इंसानियत के नाते ही बिना जान पहचान के भोला ने रीमा की जिम्मेदारी उठा ली थी । जब भोला अपनी पत्नी गौरी को शहर ले आया तब तो रीमा का भोला के परिवार से और गहर रिश्ता हो गया । गौरी जब गर्भवती थी तब उसकी पूरी देखभाल रीमा ने ही की थी ।

रीमा ने भी भोला की तरफ देखा लेकिन उसकी आंखों में भोला के लिए पहले जैसा स्नेह व सम्मान नहीं था । मानों जैसे कह रही हो कि “भईया ऐसा करना ठीक नहीं है ।” इधर भोला ने भी उसकी आंखें पढ़ लीं और खुद की नज़रें फिर से नीची कर लीं । यहां किसी को ये बात समझ नहीं आ रही थी कि जिस बच्चे के लिए भोला महीनों से सओने सजा रहा था वो उसे आखिर क्यों बेच रहा है । वो अक्सर मालिक से अच्छे स्कूल की फीस के बारे में पूछता था । उसकी एक बेटी भी थी जिसे उसने उसकी ज़िद पर गांव में ही उसकी दादी के साथ छोड़ दिया था । बच्चे के जन्म के बाद वो उसे भी यहां बुलाना चहता था लेकिन अब तो जैसे उसका मैन ही बदल गया था ।

“लो भोला ये पूरे 10 लाख हैं । तुम्हारी बाक़ी की ज़िंदगी आराम से कटेगी ।” मालिक ने खिलखिलाते हुए कहा । भोला को फिर से अनचाही मुस्कान चेहरे पर सजानी पड़ी ।

“अब कुछ दिन यहीं रुक जाओ । हालात सही हो जाएं फिर जाना ।” मुद्दतों बाद पूरे हुए किसी ख्वाब की तरह मालकिन बड़ी हसरत से बच्चे को देखती हुई बोली ।

“नहीं मालकिन, सालू राह देखती होगी । हालात ना जाने अब कब सही हों । इस हालात के चक्कर में बच्ची को और कितना इंतजार करवाएंगे । वैसे भी अब इहाँ मन नहीं लगेगा ।” आखिरी शब्द कहते हुए भोला का गला भर आया । मालिक मालकिन भी कुछ बोल ना सके ।

“मालिक एक ठो मदद और कर दीजिए । गांव जाने में कतना परेसानी है ई तो आप जान ही रहे हैं । ऐसे में हेतना पइसा साथ ले के चलना ठीक नहीं होगा ।”

“हां ये तो सही कह रहे हो भोला । कहो तो किसी बैंक खाते में डलवा दूं?”

“जी, ये खाता लंबर दे रहे हैं । आधा पईसा ई वाले खाता पर आज ही डलवा दीजिएगा और आधा पइसा के लिए एक ठो नया खाता खुलवा दीजिएगा ।” भोला की बात को मालिक मालकिन दोनों ही ना समझ सके और एक दूसरे का मुंह ताकने लगे ।

“नये खाता क्यों ? और किसके नाम से ?”

“हमारे इस बेटे के नाम से मालिक, जो अब आपका है ।” भोला ने बच्चे की तरफ देखते हुए कहा ।

“ये सब क्यों भोला ? क्या हम पर यकीन नहीं तुम्हें ?” मालकिन ने भोला को देखते हुए कहा ।

“यकीन न होता मालकिन त इस समय हमारा बच्चा हमारी गोद में होता । यकीन है तभी आपको दे रहे हैं ।” भोला ने मालकिन की आंखों में आंखें डालते हुए कहा ।

“फिर इसके लिए पैसे क्यों छोड़ रहे हो । जानते हो ना कि हम इसकी कितने अच्छे से परवरिश करेंगे । ये पैसे तुम रखो तुम्हारे काम आएंगे ।”

“मालकिन इंसान अपने परिवार के लिए कमाता है । गौरी हमें छोड़ कर चली गयी । सालू के लिए आधा पैसा रख लिए हैं । बाक़ी हम तो मजूर आदमी हैं बिना मजूरी किए हमें चैन कहां मिलेगा । उतना पर्याप्त होगा हमारे लिए । जब सबके लिए करेंगे तो इसके लिए क्यों छोड़ दें ।” मालिक भोला की बातों को समझ रहे थे लेकिन मालकिन को ऐसा लग रहा था जैसे भोला आगे कभी भी अपने बच्चे को छीन लेगा इसीलिए वो ऐसा कर रहा है । उनकी गोद में बड़ी प्रतीक्षा के बाद एक बच्चा आया है वो उसे खोना नहीं चाहती ।

“भोला इसकी चिंता अब तुम छोड़ दो । ये हमारे साथ दुनिया का हर सुख भोगेगा । इसे किसी चीज़ की कोई कमी नहीं होगी । हम इसे इतनी आलिशान ज़िंदगी देंगे जिसके बाद एक वक्त आएगा जब तुम इसे सामने पा कर भी ये कल्पना नहीं कर पाओगे कि ये तुम्हारा बेटा हो सकता है ।” मालकिन ने अपने अन्दर का सारा डर और गुस्सा भोला के सामने रख दिया । लेकिन भोला को इन बातों से कोई फ़र्क नहीं पड़ा उल्टा वो मुस्कुराने लगा ।

“हम जानते हैं आप बहुते धनिक हैं मालकिन । हमें इस बात पर भी तनिक संसय नहीं है कि आप हमारे बेटे का खूब अच्छा से खयाल रखेंगी । लेकिन मालकिन, क्या है ना कि हमें इस समय पर जरा भरोसा नहीं है । आप हमको बहुत समय से जानती हैं लेकिन क्या आप कभी सोची थीं कि भोला जईसा आदमी पइसा के लिए अपना बच्चा बेचेगा ? एक पिता अपना बच्चा बेच दे, यकीन टूटने के लिए इससे ज़्यादा और क्या बड़ी वजह हो सकती है । हम बस चाहते हैं कि हमारे बेटे के नाम पर आप ई मुट्ठी भर रुपया जमा करवा दीजिए । हमको इससे सन्तोस मिल जाएगा । बाक़ी ईश्वर आपको तरक्की दें । आपकी धन सम्पदा हमेशा बढ़ती रहे मालकिन ।” मालिक भोला के सामने शर्मिंदा था । मालकिन अभी भी डर के घेरे में थी ।

“मालिक हम निश्चिंत हो कर जाएं ?” भोला ने मालिक की ओर देख कर कहा ।

“हां भोला । बाक़ी जैसा तुमने कहा वैसा ही होगा ।” इसके बाद भोला ने हाथ जोड़े अपने बच्चे को एक नज़र देखा और उस हॉलनुमा कमरे और उस आलिशान घर से बाहर निकल आया । घर से निकलते हुए उसने एक नज़र उस क्वाटर पर डाली जहां गौरी ने एक नई ज़िंदगी के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान की थी ।

वो घर से निकला ही था कि तभी उसका फोन बजा । भोला अपने खयलों की दुनिया से बाहर आया, जेब से फोन निकाला और आँसूं पोंछते हुए नंबर देखा । नंबर देखते ही वो हल्का मुस्कुराया और फोन उठा लिया ।

“भईया पईसा का कोनो उपाय हुआ ? सालू का हालत बहुत बिगड़ रहा है ।” उधर से जो आवाज़ आ रही थी वो बेचैनी के कारण कांप रही थी ।

“अब सालू को कुछो नहीं होगा हरी भाई । थोड़ी देर में खाता पर पईसा पहुंच जाएगा । तुम ईलाज शुरु करवा देना तुरंत । हम जल्दी ही पहुंचेंगे ।” इतना कहने के साथ ही फोन कट गया । भोला एक बार पीछे मुड़ा और उस घर को देखते हुए हाथ जोड़ लिए जिसने उसे 15 सालों तक सहारा दिया । इसके साथ उसने उस बेटे से माफी मांगी जिसे वो यहां छोड़े जा रहा था । इसके बाद वो गौरी की यादों को साथ लिए अपने सफर पर निकल पड़ा ।

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