poem yaad rahoge

कविता : याद रहोगे

हम सब एक दिन मर जाएंगे। इस संसार से मुक्ति पा जायेंगे। और छोड़ जाएंगे अपनी लेखनी व कर्म। जिस के कारण ही याद किये जाएंगे।। शब्दो के वाण दिल को बहुत चुभते है। दिलसे जुड़ी बातों को ही याद… Read More

poem door ho gaye hai

कविता : दूर हो गये

कैसा ये दौर आ गया है, जिसमें कुछ नहीं रहा है। और जिंदगी का सफर, अब खत्म हो रहा है। क्योंकि इंसानों में अब, दूरियाँ जो बढ़ रही है। जिससे संगठित समाज, अब बिखर रहा है।। इंसानों की इंसानियत, अब… Read More

Happy Rakhi

गीत : राखी का त्यौहार

आया राखी का त्यौहार, जिसमें दिखता भाई-बहिन का प्यार। साथ पले और साथ पढ़े हैं। खूब मिला बचपन में प्यार। भाई-बहन का प्यार बढ़ाने। आया है राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार। लाया खुशियों की बौछार। बांध रखा है… Read More

poem kese jiya jaye tum bin

कविता : कैसे जिया जाये तुम बिन ?

कैसे बताऊँ क्या हो गई ? मेरी ज़िन्दगी तुम बिन, बोझिल सी हो गई, ये ज़िन्दगी तुम बिन, खो गई कहीं दिल की, हर ख़ुशी तुम बिन, गुमसुम सी हो गई, ज़िन्दगी तुम बिन, न चाँद ना सितारे, ना नजारे… Read More

chaupal in village

कविता : ये क्या हो गया

हंसते चीखते गली मोहल्ले, अब वीरान से हो गए है। शहर के सारे चौहराये, अब सुनसान हो गए है। पर घर परिवार के लोग, घरों में कैद हो गए है। और परिवार तक ही, अब सीमित हो गए है। और… Read More

lonely boy

कविता : दिल करता है मेरा

ना जीने को दिल करता है, ना हीं मर जाने को, दिल करता है मेरा, सुन्दर – सा नगर बसाने को । जहाँ ना हो चोरी ड़कैती, ना हीं हो मर महँगाई की; जहाँ पाप समझे सब खाना, कमाई हराम… Read More

love letter

ग़ज़ल : ख़त

हिज्र में उसका मेरे ही सामने ख़त को यूं फाड़ देना कि तु भी जाकर के मेरे सारे ख़त-वत को यूं फाड़ देना आज भी उसके बदन की खुशबू आती है उसके ख़त से, कि नही होता हैं आसां अपनी… Read More

bhanwar jaal

कविता : भंवर जाल

बनाकर आशियाना अपनी मोहब्बत का, क्यों तुम गिरा रहे हो। जमाने के डर से शायद, तुम भाग रहे हो। और लोगो के भंवर जाल में, तुम फँस गये हो। और अपनी मोहब्बत का, जनाजा खुद निकल रहे हो।। ये दुनियाँ… Read More

kisan

कविता : किसान की व्यथा

मैं किसान हूँ  अब आपने अनुमान लगा ही लिया होगा कि मेरे पिता एवं पितामह भी अवश्य ही किसान रहे होंगे आपका अनुमान सही है श्रीमान  मेरे पूर्वज भी थे किसान किसान का पुत्र किसान हो या ना हो किसान… Read More

poem chaht to bas

ग़ज़ल : चाहत तो बस

निशानी देने वाले अपनी कहानी भूल गए कहानी तो छोड़िए आंख का पानी भूल गए आप ही क़ैद किये थे दिल को तह खाने में, और आप ही नज़रों की निगरानी भूल गए बस उन्हें यक़ीन नहीं कि वो क़यामत… Read More