wo ruth kar

ग़ज़ल : वो रूठ कर के

वो रूठ कर के आज हम से इस कदर चला गया कि जैसे आसमां से तारा टूट कर चला गया दिल-ओ-दिमाग मे मेरे बना के अपनी ही कब्र बिलखता छोड़ कर के कोई उम्र भर चला गया कि कल तलक… Read More

mohabbat

ग़ज़ल : ख़ुदी से ज़िदगी में एक भूल कर बैठे

ख़ुदी से जिंदगी में एक भूल कर बैठे वफ़ा-ए-इश्क़ मे ख़ुद को फ़ुज़ूल कर बैठे ये सोचते थे कि खुशबू कभी तो आएगी ख़िज़ाँ के मौसमों में ये मलूल कर बैठे यही तो होना था अंजाम आज़माने का, तबाह कर… Read More

fateh-e-zindagi

तीन मुक्तक : फतह-ए-जिंदगी

सच्चाई के वास्ते तो हम ख़ुदा से ले लेंगे रार तक कभी भी नहीं रूकेंगें जीवन में मौत से हार तक जब तक रहेगा अपने मन में एक अटल विश्वास तब तक उठेंगी हिलोरें धरा से गगन के पार तक… Read More

old women aasha tai

संस्मरण : आशा ताई

“सुनिए ‘आशा ताई’,” हां? अरे सुनिए तो, कहिए तो.. “आप सुनती ही कहा हैं. कब से आशा ताई आशा ताई कर रहें हैं.” “अरे कबसे सुन ही तो रही हूं. वैसे आज आप बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं. आशा ताई…”… Read More

love letter

ग़ज़ल : ख़त

हिज्र में उसका मेरे ही सामने ख़त को यूं फाड़ देना कि तु भी जाकर के मेरे सारे ख़त-वत को यूं फाड़ देना आज भी उसके बदन की खुशबू आती है उसके ख़त से, कि नही होता हैं आसां अपनी… Read More

गीत : कैसे कटेंगे वो पल

तुम ही कहो, कैसे कटेंगे वो पल जिस पल में तुमने कहा था हम साथ रहेंगे हरपल    अब मेरी धड़कनों की आवाज से तुम कैसे रू-ब-रू होगे किसी गैर को सीने से लगाकर उस पल में मुझे तुम भूल… Read More

ग़ज़ल : इक क़ायदा

मुहब्बत में फ़क़त इक क़ायदा हो उसका क्या कहना मुहब्बत करता है जो जायज़ा हो उसका क्या कहना। निगाहों के इशारे, ख़त, जुबां धोखा दे सकते हैं। जिसे जज़्बात के तह का पता हो उसका क्या कहना जो उसके लब… Read More

ghazal tumse hi payar hoga

ग़ज़ल : तुमसे ही प्यार होगा

नासूर का तु कब तक यूं हीं शिकार होगा नासूर को भी इक दिन तुमसे ही प्यार होगा तुम पे न हक़ ज़तायें कहती हो ग़र मिरी जां तो ख्वाब में ही कम से कम इख़्तियार होगा दिखती ही वो… Read More

ghazal sirf tum-mere

ग़ज़ल : तुम सिर्फ़ मेरी

किस तरह शब-ओ-सुबह कह दूं तुम्हें तुम सिर्फ़ मेरी तुम दो तो कोई वजह कह दूं तुम्हे तुम सिर्फ मेरी ग़म – ए – गेसू की ये तह कह दूं तुम्हे तुम सिर्फ़ मेरी तुम ख़ुदा हो किस तरह कह… Read More

संस्मरण : अरे बाप रे!

अरे बाप रे, आप तो कंचे खेलते हैं. “क्यूं कंचे खेलना ग़लत हैं..? मै तो ताश भी खेलता हूं. तब तो ताश खेलना पाप हो जाएगा हैना..?” क्या..? ताश भी खेलते हैं. कल का जुआं भी खेलेंगे. हुंह! “तो क्या… Read More