fateh-e-zindagi

सच्चाई के वास्ते तो हम ख़ुदा से ले लेंगे रार तक
कभी भी नहीं रूकेंगें जीवन में मौत से हार तक
जब तक रहेगा अपने मन में एक अटल विश्वास
तब तक उठेंगी हिलोरें धरा से गगन के पार तक

जिंदगी तुझसे मिली हताशा में अलग करेंगे इस बार
ग़म में भी इतना मुस्कुराएंगे कि तु हो जाए गुलज़ार
ए मेरी जिंदगी अब तु मुझे चाहे जितने भी धोखे दे दे
बेवफ़ाई में भी वफ़ा करेगें तुम्हीं से करते रहेंगें प्यार

यहाँ पलता काल से भी बड़ा कोई विकराल है
जिसके पैर के रखते समूचा छा जाता भूचाल है
कठिनाइयों को जाकर बता दो देश के नौजवानों
हमारे पास सभी कालो का काल यौवनकाल हैं

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