कविता : तलाशेंगे

अंधेरा भाग जाएगा हमी रास्ते तलाशेंगे “उजाले के लिए मिट्टी के फिर दीये तलाशेंगे” बुरे लोगों की है बस्ती मगर विश्वास है हमको मिलेंगे लोग अच्छे हम अगर अच्छे तलाशेंगे चलो चलते चलो एक दिन ज़माना साथ आएगा अभी जो… Read More

कविता : जाने कब से

ये लड़ाई इतनी आसान नहीं, बहुत ही कठिन है। है जितनी मुश्किल ये राहें, मंजिल पाना उतना ही जटिल है। मद्धिम-मद्धिम क्षीण हो रही मेरे भीतर की प्रबल इच्छा-शक्ति, हे! नाथ! मेरे भीतर की आत्मशक्ति जगाओ। जो है मुझमें पाने… Read More

व्यंग्य : दिवाली ‘पटाखा’ और ‘फुलझड़ियाँ’

जब से इस देश में सनी लियोनी टाइप्ड विदेशी पटाखा क्या आया है तब से न जाने क्यों घर के पटाखे सीलन भरे ही नज़र आने लगे हैं । अब तो माहौल ही ऐसा है कि अपने घर का बम… Read More

एक दिया चौखट पर

नहीं मनती दिवाली अब घर पर कहाँ से शुरू करें बल्बों की झालर लेकर घर की छत के कोने-कोने में अब कोई नहीं घूमता… … पेचकस, टेस्टर, सेलो टेप लेकर दो तीन बिजली के झटके खाकर अब इलेक्ट्रिशियन कोई नहीं… Read More

रोशन दिवाली कब

दीपों की जगमग आज हुई रोशन, चहुँओर लगे देखो खुशहाली। मांवस रात लगे पूनम सी, काली है पर भरपूर उजियाली। पर जिससे हर घर में है रौनक, उसका घर आज लगता है खाली। सीमा पे बैठ वो लिए बन्दूक, भारत… Read More

व्यंग्य : मन का रावण

हाँ, तुम्हारी मृदुल इच्छा हाय मेरी कटु अनिच्छा  था बहुत माँगा ना तुमने किंतु वह भी दे ना पाया था मैंने तुम्हे रुलाया… ये एक तसल्ली भरा सन्देश है उन लोगों की तरफ से जिन्होंने इस बार मन के रावण… Read More

पिता जी के रहते एक दिवाली थी पिता जी के बाद एक दिवाली है

जीवन के 25 वसन्त में यह तीसरी दिवाली होगी जब बिना पिता जी के आशीर्वाद के दिवाली बनाई जाएगी और मेरे जहन में वो यादें हमेशा ताज़ा बनी रहेंगी जो पिता जी के साथ बनी थीं। उन्हें ताउम्र अपने जीवन… Read More

कविता : इंद्रधनुषी रात

इंद्रधनुषी रात थकने सी लगी है। भोर में कोयल कुहकने सी लगी है।। गीत मंगल के सजे तोरण कलश पर तलहथी की छाप उगने सी लगी  है।। गंध-मेंहदी ने किया तन-मन सुवासित बाग में  बेला चमकने सी लगी है।। छंद… Read More

कहानी : आग

गाँव के एक घर में आग लग गई थी, वहीं गाँव के मंदिर में लोग नारियल फोड़ रहे थे। जिस घर में आग लगी थी उस घर का लड़का एक रात किसी दूसरे गाँव की लड़की के साथ उस मंदिर… Read More

पुस्तक समीक्षा : भूख परोसती है अनुपमा गाँगुली का चौथा प्यार

हिंदी साहित्य में नई वाली हिंदी के नाम से मुकाम बना रहे आज के लेखकों में प्रेम सबसे महत्वपूर्ण और केन्द्रीय बिंदु बनकर उभरा है। लेकिन अभी तक मुझे उस तरह के प्रेम में डूबे कहानी के नायक या नायिकाएँ… Read More