Topper Divyanshi Jain

कहानी परसेन्टेज की

एक परीक्षार्थी को प्रत्येक विषय मे फुल मार्क्स कैसे मिल सकते हैं? सवाल बहुत बड़ा है, सवाल जायज है और इस सवाल के लिए हमें भला बुरा भी कहा जा सकता है लेकिन सवाल है तो है और सवाल हमेंशा… Read More

व्यंग्य : चीनी कम

कुछ समय पहले टीवी पर एक इश्तहार आता था जिसमें सब झूम झूम कर कहा करते थे कि “जो तेरा है वो मेरा है  जो मेरा है वो तेरा” इस थीम को ध्येय वाक्य बना लिया चीन ने और चौदह… Read More

poem bhula na sake hum

कविता : जिसे भूल कर भी भुला ना सके हम

जिसे भूल कर भी भुला ना सके हम, ‘मनोहर’ उसे ना फिर कभी याद आ सके हम, जिसे भूल कर भी …. यूँ बातें बहोत की बिना बात की, पर हाल ए दिल अपना बता ना सके हम, जिसे भूल… Read More

Neem Tree

लोक गीतों में नीम का पेड़

हमारे लोकसाहित्य में नीम के पेड़ को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। लोकगीतों में ‘नीम के पेड़’ पर कई प्रसिद्ध लोकगीत मिलते हैं। कल एक यह प्रसिद्ध अवधी लोकगीत सुना।जिसे बहुत बार पढ़ा था लेकिन कल सुनने का मौका मिला- “बाबा… Read More

Writer Bhisham Sahni

पुण्यतिथि पर विशेष : तमस में उजियारे का नाम भीष्म साहनी

भीष्म साहनी हिंदी साहित्यकारों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। आठ अगस्त 1915 को रावलपिंडी में इनका जन्म हुआ था। वे हिन्दी फ़िल्मों के जाने माने अभिनेता #बलराज साहनी #balraj sahani के छोटे भाई थे। मुझे साहित्य में गद्य पसंद है।… Read More

poem chalne to mujhe

कविता : चलने दो मुझे

जलता हूँ मैं अपने आपमें अक्षर बन जाता हूँ नित्य प्रज्ज्वलित ज्वाला मेरे बनते हैं अक्षर प्रखर असमानता, अत्याचारों के विरूद्ध आवाज़ बनकर आते हैं ये मेरे प्रखंड प्राणाक्षर पंचशील का हूँ मैं साधना में अल्प की दृष्टि से देखो… Read More

कविता : कुछ सपने थे जो टूट गए

कुछ सपने थे जो टूट गए, कुछ अपने थे जो छूट गए, पहले तो कुछ ना आभास था, यह भी होगा, ना विश्वास था, पर होनी तो होकर गुजरी, सब सगे स्नेह से लूट गए, कुछ सपने थे जो टूट… Read More

गीत : कितना समझे

जितना हमने है देखा, और अबतक समझ हम पाये। संसार के इस चक्कर ने, हम सबको बहुत रुलाया। हो हो हो ………………।। लोगो की भावनाओं से इन सब ने अबतक खेला। कभी धर्म जाती के नाम पर, उन्हें आपस में… Read More

कविता : मिथिला

मिश्री जैसी मधुर है हमारी बोली हम प्रेमी पान मखान और आम के भगवती भी जहाँ अवतरित हुईं हम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँ सूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभाती सुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धक… Read More

poem bolta hu mai

कविता : बोलता हूँ मैं

मैं समाज से बोलता हूँ दुनिया से बोलता हूँ मनुष्य से बोलता हूँ मेरे पास वह शक्ति नहीं उन भेड़ियों से बोलने का कुटिल तंत्रों के साथ लड़ने का होने दो मुझ पर इनके नादान परिहास रचने दो मंत्र –… Read More