zindgi abhi aur bhi hai

लेख : ज़िदगी अभी और भी है…

तमाम संघर्षों के बीच भी ज़िदगी होती है। जब हम निराश, हताश और संघर्षों से टूटने लगते हैं तब कभी कभी लगता है कि जीवन बस हमारा इतना ही था। जीवन की शेष संभावनाएं स्वतः खारिज हो जाती है। ऐसे… Read More

suraj

गोलेन्द्र पटेल की कविताएँ

1. किसान है क्रोध ••••••••••••••••• निंदा की नज़र तेज है इच्छा के विरुद्ध भिनभिना रही हैं बाज़ार की मक्खियाँ अभिमान की आवाज़ है एक दिन स्पर्द्धा के साथ चरित्र चखती है इमली और इमरती का स्वाद द्वेष के दुकान पर… Read More

chhath parv

कविता : छठ पर्व

छठ तिथि शुक्ल पक्ष कार्तिक में, मनाया जाता ये अनुपम छठपर्व। सूर्यदेव की उपासना का पर्व यह, सौर मंडल के सूर्यदेव का है पर्व।। सूर्योपासना है सर्वश्रेष्ठ पर्व की, सूर्योपासना की थी अत्रि पत्नी ने। और श्रेष्ठतम इस व्रत को… Read More

kitab

कविता : मोड़ा हुआ ‘किताब’ का पन्ना

कई महीनों से बल्कि साल के बराबर वैसे देखा जाए तो हमेशा से.. रैक में पड़ी किताबे जद्दोजहद करने के बाद भी, सड़को पर निकलकर सांस्कृतिक सामाजिक राजकीय विद्रोह कर पाने में नाकामयाब रही हैं। शायद, यह पूरी तरह सच… Read More

diwali2023

लेख : दीपावली पर दीप जलाये

सब से पहले तो में अपने देशवासियों को दीपावली की बधाई देता हूँ। इस बार की दीपावली आप सभी को नई रोशनी लेकर आये और आपका जीवन खुशियों से भर जाए साथ ही एक निवेदन भी करना चाहूँगा की आप… Read More

AmritaPoem

कविता : गंवारा न था

ये मेरे भीतर छिपी व्याकुलता ही है, जिसने मेरे स्वभाव में अधीरता को जन्म दिया है। माना मेरी बुद्धि संकीर्ण थी और बुद्धजीवियों के व्यापक परंतु, इस संकीर्ण ने ही ढांढस बंधा स्वयं को संभाला, विपरीत व्यथाओं मेँ हर-पल। प्रतिकार,… Read More

PAAN MASALA

नशे की पहली ख़ुराक : इलायची की आड़ में गुटखे का विज्ञापन

फिल्मों के बाद अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने जिस तरीके से सपनों की दुनिया दिखलाने के साथ-साथ इंसानी रिश्तों, जज़बातों और उसके भावनाओं को सबसे ज्यादा कैश कराने का काम किया है, उसमें विज्ञापनों की एक बहुत बड़ी दुनिया है। जो… Read More

suraj

कविता : जिद ने हमको सूरज बनाया है

जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका जमानेके इशारे से जो अपना हर कदम बढ़ाओगे मानो बात या न मानो मगर तुम फिसल जाओगे जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका तुम्हारी रफ्तार से पीछे रहता है तो ये खीझता… Read More

lord radha kahana

कविता : मेरे गिरधर ,मेरे कन्हाई जी

जब भी आवाज दूं चले आना , मेरे गिरधर , मेरे कन्हाई जी । रीत प्रीत की भूल न जाना , जो भक्त-भगवान बनाई जी । तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से, दरस को तरसे ये अखियां। बोल बोल-के छेड़े है जग… Read More

neelkanth

कविता : विजयदशमी और नीलकंठ

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे, समुद्र मंथन से निकले विष का पान भोले शंकर ने किया था इसीलिए कंठ उनका नीला पड़… Read More