lover suicide

कविता : रार-हार-तकरार

जिंदगी है महंगी , और मौत क्यों हो गई सस्ती….?? हाय रे…….!! ये कैसी अनजान मस्ती । छोटी-छोटी सतही बातों पर, क्यों हो रही है जीवन की केवल पस्ती और पस्ती (हार)? जीवन में कभी क्या कोई हार न होगी… Read More

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कविता : संघर्षों से ही सफलता

खिले कमल कीचड़ में कैसे, गहन अंधेरा दीप जले। उल्टे बांस बरेली जैसे , मछली उल्टी धार चले। तूफान भरे सागर में वो ही , जीवन नइया चलाता है । कर जिगरा फौलाद का अपना , चिड़िया बाज लड़ाता है… Read More

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कविता : सफेद बादल काले बादल

कहां बरसती है बरसात , भले ही हो बादलों की बारात । सुखी रूई के फाए से , इधर-उधर उड़ते रहते हैं । काम न आए मरहम रखने के भी , जख्म हरे और रिसते रहते है । और तो… Read More

ganpati scs

भजन : गजानन आराधना

गजानन आओ नी इक बार …। गजानन आओ नी इक बार ….। निसदिन तेरी बाट में जोहूं , बैठूं पलक बुहार …। गजानन आओ नी इक बार….। धूप-दीप और फल-फूलों से , तुझ को भोग लगाऊँ । लगा तेरे अगर… Read More

flower girl

काव्य : जगजीवन चालीसा

फूल-फूल के फूलने से तु, प्यारे ‘फूल’ न बन जाना ।। कांटो की जो जरा चुभन से, फटे फूल ,जीवन बचाना।। जीवन बने वट वृक्ष सा तेरा, फल फूलों से लदा हुआ ।। कंटक कांटे दुख भरी जलन का ,… Read More

himtaj mata

भजन : जय हिंगलाज मां

जय-जय तेरी मां हिंगलाज, दर्शन करने आए आज । तेरा आशीर्वाद जो पाएं , भवसागर से हम तर जाएं । दुनिया में ज्ञान के दीप जलाएं, तेरी अमरज्योत उजलाएं । उड़ते रहें पंख परवाज । जय-जय तेरी मां हिंगलाज ,… Read More

dhanteras

कविता : पाँच दिवसीय पर्व दीपावली

धन की वर्षा हुई बाजारों में , चेहरों पर खुशियों की लड़ियाँ जगमगाई। धन से धन्य दिन-रात हुए जगमग, धन तेरस ने शुरुआत करवाई । कुबेर ने घर आंगन खोला खजाना , धन-धान्य खुशियों की घर-घर लहराई । धन की… Read More

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कविता : एक दीप जलाएँ, उनके नाम

लड़ियाँ दीपों की, जले चारों ओर, आज हुई जगमग, रोशन दिवाली। चहुँओर चेहरों पर जलते दीपों सी जगमग, चहुँओर ओर देखो खुशचेहरों की खुशहाली। मांवस रात भी , लगे पूनम चमकती काली है फिर भी, लगे भरपूर उजियाली। पर जिनसे… Read More

lord radha kahana

कविता : मेरे गिरधर ,मेरे कन्हाई जी

जब भी आवाज दूं चले आना , मेरे गिरधर , मेरे कन्हाई जी । रीत प्रीत की भूल न जाना , जो भक्त-भगवान बनाई जी । तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से, दरस को तरसे ये अखियां। बोल बोल-के छेड़े है जग… Read More

navratra

नवरात्र-शक्ति-आराधना

(सर्व अमंगल, मंगलकारी, दुःख-पीड़ा से तारण हारी। जग-तम में तू ही उजियारी, जीव कंटको में फुलवारी। अब तो आजा, हे जग माँ तू, यह दुनियाँ तुझ ही को पुकारी।)… 2 स्मरण तेरा शुरू करें हम, घट को स्थापित करके। घट-घट… Read More