राखी के धागों को कलाई भेजे हैं भइया तुमको बहुत बधाई भेजे हैं रक्षाबंधन पर्व नहीं बस तारों का रक्षाबंधन पर्व न बस उपहारों का भाई-बहन का प्रेम-पर्व रक्षाबंघन सच बोलूँ तो राजा है त्यौहारों का तार-तार होते रिश्तों के… Read More
राखी के धागों को कलाई भेजे हैं भइया तुमको बहुत बधाई भेजे हैं रक्षाबंधन पर्व नहीं बस तारों का रक्षाबंधन पर्व न बस उपहारों का भाई-बहन का प्रेम-पर्व रक्षाबंघन सच बोलूँ तो राजा है त्यौहारों का तार-तार होते रिश्तों के… Read More
भाई बहिन का बंधन, जिसको कहते रक्षाबंधन। स्नेह प्यार से बंधा रहे, भाई बहिन का रिश्ता। इसलिए तो आता है, हर साल ये रक्षा बंधन। बहिना सबसे मिलती है, मायके में इसदिन आकर। दिल सबके खिल उठाते है, बहिना से… Read More
भाई का लाढ है राखी, बहन का प्यार है राखी!! लड़ना और फिर झकड़ना, बहन को खुश रखना है राखी!! कहि भाई का बलिदान है, तो बहन का गौरव है राखी!! बॉर्डर पर जो तैनात है सिपाही, उस बहन का… Read More
हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट और क्लासिक फिल्मों में शुमार मुगल ए आजम का मशहूर गीत जब प्यार किया तो डरना क्या जिस शायर ने लिखा है वो जनाब शकील बदायूँनी थे। शकील ऐसे शब्द चुनते थे सीधे दिल… Read More
हिन्दी सिनेमा में “चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो”… (चौदहवीं का चांद) या फिर “प्यार किया तो डरना क्या”…(मुग़ले आज़म) जैसे गीतों के जरिये अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले मशहूर शायर और गीतकार “शकील बदायूँनी” जी का आज जन्म… Read More
याद है आज भी बचपन का अफसाना वो बाजार मे सजा गुड़ियों का तराना।। चाहती थी मैं वो आंख मिचती गुड़िया पर पापा की जेब मे न थी पैसे की पुड़िया।। मन मे ख्वाहिश दबा के भी थी मुस्कुराई पापा… Read More
हर सावन में आती राखी। बहिना से मिलवाती राखी। बहिन-भाई का अनोखा रिश्ता। बना रहे ये बंधन हमेशा।। जो भूले से भी ना भूले। बचपन की वो सब यादे। बहिन-भाई का अटूट प्रेम। सब कुछ याद दिलाती राखी।। भाई बहिन… Read More
कभी नाम बदल लेता है, कभी काम बदल लेता है, सब कुछ पाने की ललक में, वो ईमान बदल लेता है। इस बेसब्र आदमी को नहीं है किसी पे भी भरोसा, गर न होती है चाहत पूरी, तो भगवान् बदल लेता है। है कैसा आदमी कि रखता है बस हड़पने की चाहत, गर मिल जाए कुछ मुफ्त में, तो आन बदल लेता है। इतने रंग तो कभी गिरगिट भी नहीं बदल सकता है, यारों जितने कि हर कदम पर, ये इंसान बदल लेता है। कमाल का हुनर हासिल है मुखौटे बदलने का इसको, पड़ते ही अपना मतलब, झट से ज़ुबान बदल लेता है। “मिश्र” काटता है बड़े ही ढंग से ये अपनों की जड़ों को, सामने दिखा के भारी ग़म, पीछे मुस्कान बदल लेता है। +160
मिर्जापुर, बनारस से लेकर समूचे पूर्वांचल और बिहार के कुछ हिस्सों में जो भोजपुरी भाषी और समाज के लोग है उनमें एक खास तरह के गीत की परम्परा देखने को मिलती है, जिसे कजरी कहा जाता और यह विशेषतः सावन… Read More
“खता मत गिन दोस्ती में, कि किसने क्या गुनाह किया.. दोस्ती तो एक नशा है, जो तूने भी किया और मैंने भी किया।” “दोस्ती सिर्फ पास होने का नाम नही, अगर तुम दूर रहकर भी हमें याद करो… इससे बड़ा… Read More