नहीं आता है मुझको आह का गान, वियोगी कवि सी नहीं मेरे आलाप की तान, मैं क्यों कर न सका वैसा ही करुण विलाप, जैसे कौंच खग ने किया था वेदना का प्रलाप, मेरे शब्द नहीं बन पाए पीड़ा की… Read More
नहीं आता है मुझको आह का गान, वियोगी कवि सी नहीं मेरे आलाप की तान, मैं क्यों कर न सका वैसा ही करुण विलाप, जैसे कौंच खग ने किया था वेदना का प्रलाप, मेरे शब्द नहीं बन पाए पीड़ा की… Read More
आज 3 जनवरी को भारत की पहली महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारिका, मराठी की पहली कवयित्री, भारतीय नारीवादी आंदोलन की सूत्रधार, स्त्रियों को मुक्ति की राह दिखाने वाली महामहिला, राष्ट्रमाता पूजनीया किसानिन सावित्रीबाईफुले की जयंती है। सावित्रीबाई फुले की जयंती… Read More
नई साल की राम-राम। नई साल की राम-राम।। सब करो नई उम्मीदों से काम, कोई न बनो काम हराम। सब करो शुरू उम्दा काम, कोई न बनो काम हराम। नए काम की राम-राम। नई साल की राम-राम।। सब गरीबी-अमीरी;ऊँच-नीच; जाति-पाति… Read More
लोगों को इस साल में भले ही कुछ नयापन नजर न आ रहा हो, हमें तो मौजा ही मौजा ही दिख रहा है । चुनावी साल है तो जनता जनार्दन की बल्ले -बल्ले रहने वाली है । व्यंग्यकार को चिकोटी… Read More
थोड़ी खुशियां, थोड़े गम थे, यादें रह गई बाकी। जिनको जो मिलना था मिल गया, कुछ को आशा जरा सी। ‘अजस्र’ आशा से जीवन चलता, दिन-दिन, पल-पल गिन-गिन। आस टूटे तो श्वास टूट जाए, गुजरा साल वो अपना ही। दिन-दिन,… Read More
गाँव में मजदूरों को बारह महीने प्रतिदिन काम नहीं मिलता है। गर्मी के दिनों में कुआँ का पानी सूख जाने के बाद किसान नरेगा में मजदूरी करने जाते हैं। अधिकांश मजदूर गर्मी के दिनों में काम नहीं मिलने पर चैक… Read More
गाँव, गरीबी, किसान, खेतीबाड़ी और ग्रामीण जीवन की दुश्वारियाँ, स्त्रियों की विडंबनाएँ, उनके पहाड़ों से दर्द, सामंती सोच के प्रेतों की क्रूरताएँ व करगुजारियों आदि विसंगतियों – विद्रूपताओं को ध्वस्त करने की अदम्य जिजीविषा लेकर आई है युवा लेखक कुशराज… Read More
तुम औरें मारत रए भैंकर मार और मार रए अबै भी धीमें – धीमें सें धरम, जात, करजा और कुरीतयंन में बाँधकें अंदबिस्बास, जुमले और बेकार कानून बनाकें पढ़ाई – लिखाई सें बंचित करकें लूटत रए हमें पर अब हम… Read More
आज बहुत दिनों बाद पहाड़ों की बीच बसे गांवों में जाने का मौका मिला, सच में आज भी गांव में कुछ नहीं बदला.! ठंडी ठंडी हवा चलती है वहां, प्रकृति के शानदार नजारे आकर्षित करते हैं वहां, शहरों में तो… Read More
जीवन आशाओं की, आन है बेटी । गाथाऐं ‘ अजस्र ‘ , गुणगान है बेटी । विश्वजागृति जन-अभियान है बेटी । सप्त सावित्री धर्म, पहचान है बेटी । पिता का आदर्श, सम्मान है बेटी । खुद मां का रूप, उपमान… Read More