तब तुमने कविता लिखी बाबूजी जब फांसी पर झूला किसान, जब गिरवी हुआ उसका खेत और मकान, जब बेचा था उसने बीवी का अन्तिम गहना, तब भी दूभर था उसका ज़िंदा रहना, वो हार गया आखिर जीवन की बाजी, तब… Read More
तब तुमने कविता लिखी बाबूजी जब फांसी पर झूला किसान, जब गिरवी हुआ उसका खेत और मकान, जब बेचा था उसने बीवी का अन्तिम गहना, तब भी दूभर था उसका ज़िंदा रहना, वो हार गया आखिर जीवन की बाजी, तब… Read More
गीत गजल कविताएं, मैं लिखता हूँ । गीत मिलन के भी, जो मैं गाता हूँ।। गीत मिलन के मैं, गा के सुनता हूँ। प्रेम रस बरसाता हूँ, मैं अपने गीतों से। जग जाती है मोहब्बत, लोगों के दिलो में। मंत्रमुक्त… Read More
हे राम! मुझे हनुमान समझ कर अपना लो निज सेवक सुत अंजान समझ कर अपना लो महामूरख ठेठ नादान समझ कर अपना लो कंकड़ धूलि पाषान समझ कर अपना लो। नेह इतना बरसाओ कि मन दुःख बिसरा दे दुःख पीड़ा… Read More
युगों युगों से, काल काल में, वेदों में ,पुराणों में आलौकिक है महिमा मंडित,शास्त्रों में व्याख्यानों में। बिहू,पोंगल,माघी,ओणम खिचड़ी कोई तिलचौली विभिन्न नाम से संक्रान्ति इस भारत में जाती बोली। दक्षिण से उत्तर को आते सारँग सूर्य भगवान किसी पिता… Read More
“तड़ाक” उसने एक जोरदार तमाचा उसके गाल पर जड़ दिया था। तमाचा जड़ने के साथ ही उसका पूरा शरीर क्रोध में कांप रहा था। आँखों में अंगारे दहक रहे थे। उसकी आवाज में बिजली-सी कौंध रही थी। वह किसी भेड़िए… Read More
भारत माँ के लाल यशस्वी, कोटि- कोटि चरण वन्दन। अमर मनुज विवेकानंद जी,सह्रदय स्वामी अभिनन्दन ।। सम्मान बढ़ाया भारत का, हम विश्वगुरु हैं बतलाया। सुन शून्य की अनन्त व्याख्या,जग का माथा चकराया।। भाषण दिया शिकागो में, पश्चात वो प्रवचन कहलाया।… Read More
गौतम इस वर्ष मैट्रिक की इम्तिहान देने वाला है। इनके मित्रों के पास फोरजी मोबाइल है। वे सभी रात को पढ़ाई के नाम पर पबजी गेम खेलते हैं। गौतम भी बाबा से फोरजी मोबाइल खरीद देने की जिद करता है।… Read More
बागड़ प्रदेश के बांसवाड़ा में गोविंद गुरु के सानिध्य में पाई थी तरक्की भीलों ने उनके अथक प्रयास से छोड़ दी थी सारी बेतुकी और बर्बादी की आदतें शराब, जुआं, चोरी और मवेशी खाना गांव-गांव पैदल चलकर करते थे सभा… Read More
जंगल में जब टेशू और महुआ खिलते हैं तब सुनाई देती है फाल्गुन की आहट मालवा निमाड़ धरा पर और भगोरिया पर्व की उमंग मिलने को आतुर पिया संग निकले घर से सजकर अपनी पीड़ाओं को तजकर रंग बिरंगी पोशाक… Read More
सुबह राबड़ी का कलेवा करके निकले हैं घर से जोरू और मोहरू ऊंट को पैदल लेकर जंगल में । छोंकड़ा के पेड़ों में उल्टे लटक रहे हैं सींगर हरी हरी लूम के साथ ज्यादा ऊंचाई होने से ऊंट के मुंह… Read More