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व्यंग्य : खिड़की के बाहर का दृश्य…

गुलाब के फूलों में लगे काले कीड़ों के मुँह से गन्दी गालियाँ सुनाई दे रही थी। दिन के अँधेरे में बग़ीचे में लगे विशालकाय वृक्ष में रहने वाले पक्षी, अपने-अपने घोंसलों  में आग लगा चुके थे। आग की हरी लपटें… Read More

lord krishna

गीत : आस्था और विश्वास

कौन राग आलापू भगवन जिस से तुम आओ। सूनी पड़ी इस नगरी में रंग तुम भर जाओ। प्रभु जी आ जाओ रंग तुम भर जाओ। कौन राग आलापू भगवन जिस से तुम आओ।। बहुतों को तुमने उभारा अपने तरीके से।… Read More

ram

लघुकथा : रावण में भी राम

रामलीला का आयोजन चल रहा था। दृश्य था “सीता – हरण”। पंडाल भरा हुआ था। आयोजकों ने महिलाओं और पुरुषों के लिए बैठने की व्यवस्था, सुविधा और सुरक्षा की दृष्टि से अलग-अलग की थी। सभी लोग लीला का आनंद ले… Read More

काश! ग़ालिब ने रटौल खाया होता

“फल कोई ज़माने में नहीं, आम से बेहतर करता है सना आम की, ग़ालिब सा सुखनवर इकबाल का एक शेर, कसीदे के बराबर छिलकों पे भिनक लेते हैं, साग़र से फटीचर वो लोग जो आमों का मज़ा, पाए हुए हैं… Read More

लेख : अंक आधारित योग्यता

बिहार बोर्ड दसवीं (मैट्रिक) का परीक्षा परिणाम आया है आज । एक लंबे इंतज़ार के बाद । हमारे समाज के लिए आज का दिन बड़ा महत्वपूर्ण है । जो बच्चे प्रचंड अंक धारण किए हैं, ख़ूब चहक रहे हैं ।… Read More

nari

लेख : नारी, माया या देवी

नवरात्रि में दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली शक्ति रूपा स्त्री आज अधिकांश रूप में बेबस और लाचार नजर आती है। नारी का रूप बदला है, किन्तु नारी के प्रति संकीर्ण अवधारणाएं आज भी नहीं बदली है। आज भी… Read More

dil(2)

दोहा : सवा-शतक

‘अजस्र’ किरपा गणेश की, सारों सगरे काम । वाणी, मात-पिता सहित, लियो राम का नाम॥ ‘अजस्र’ शक्ति उस देवी से, सीता सत का नाम । कलम-मसी करते रहें, वीणापाणि प्रणाम ॥ ‘अजस्र’ बली तुम पवन से, शंकर-सुवन प्रणाम । ‘सवा-शतक’… Read More

atit

कविता : विचारों के कारखाने में

क्या है…? मेरे अंदर छिपाने का बाल्य काल से ही मैं नंगा था, पुस्तकों में मस्तक लगाके ढ़ूँढ़ता था, मैं अपने आपको, आंतरिक दुनिया में, कौन हूँ मैं आखिर…? विचार कई थे मेरे, चक्कर काटने लगे, पागल था मैं, पुस्तकालय… Read More

zamana

कविता : जमाने को जाने

बहुत संसार को देखा और बहुत इसको सुना। जमाने की हर बातों का बहुत मंथन भी किया। मैं अपने बातों को भी इस जमनो को दे सका। और लोगों की सोच को कुछ हद तक बदल सका।। विधाता ने जमाने… Read More

krishan holi

कविता : होली अपनो के संग

आओ हम सब, मिलकर मनाएं होली। अपनों को स्नेह प्यार का, रंग लगाये हम। चारो ओर होली का रंग, और अपने संग है। तो क्यों न एकदूजे को, रंग लगाए हम। आओ मिलकर मनाये, रंगो की होली हम।। राधा का… Read More