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कविता : रंग रसिया

रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More

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व्यंग्य : फिजेरिया

“सूट पहन के , लगा के चश्मा कहाँ चले ओ मतवाले , गिटपिट इंग्लिश बोल रहे हो हिंदी की गले में तख्ती डाले” मैंने यूँ ही पूछा? “चले हम फीजी ,हिंदी के लिये जल मत ओ बुरी नजर वाले पूछा… Read More

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कविता : टूट ना जाये

गया था आज उनके घर पूछने हाल चाल उनका। मगर थे नहीं घर पर वो इसलिए लिख आया पर्ची पर। जब आयेंगे वो घर पर तो पड़ लेंगे मेरी चिट्ठी। और मिलकर या लिखकर बताता देंगे अपना हालचाल।। मिला है… Read More

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विज्ञापन : शिवाजी जयंती

मातृभूमि से है गहरा नाता, शिवाजी महाराज की है यह गाथा, बाल शिवाजी को माता जीजाबाई ने, देश प्रेम का ज्ञान दिया, वीर शिवाजी के पिता ने, रण कौशल का ज्ञान दिया शिवाजी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 00

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कविता : दिल और मन

दिलमें दीपक जल उठे देख तुझे फिर से। लौटा हूँ अपने घर जो वर्षो के बाद। हाल तेरा मैं कैसे पूंछू बात करने से डरता हूँ। कहने सुनने के लिए नहीं बचा है अब कुछ।। मन की बातें मन ही… Read More

zindagi(1)

व्यंग्य : मैं व्यंग्य समय हूँ

तो हस्तिनापुर के समीप इंद्रप्रस्थ जो कि अब दिल्ली के नाम से जाना जाता है , यही मेरे व्यंग्य का खांडव वन रहा है ।अब व्यंग्य के कई अर्जुन मेरे इस खांडव वन अर्थात व्यंग्य लोक को जलाने पर आतुर… Read More

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कविता : लिख तूँ लिख

लिख तूँ लिख, सबकी सच्चाई लिख। सच लिखने में डरना मत, असली बकने में झिझकना मत। बेईमान तोय दबायेंगे, तूँ हरहाल में दबना मत। मौत से कभी डरना मत, काय मौत के बाद, फिर से जनम मिलता है। ईसें यी… Read More

seil(1)

लेख : पूर्वोत्तर भारत के छात्र-छात्राओं का समूह देश के बाकी हिस्से में भ्रमण पर

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश भर में छात्रों के हितों की बात करता रहा है। परिषद लगातार छात्र हितों के लिए प्रयासरत है। विद्यार्थी परिषद का मुख्य उद्देश्य समाज में सामाजिक सौहार्द तथा भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत… Read More

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कविता : दिल मन का हाल

मेरा मन बहुत चंचल है पर दिल मेरा स्थिर है। फिर भी सपनो में वो न जाने क्यों आते है। और अपने साथ होने का मुझे एहसास कराती है। जिसे कारण ही मेरी आत्मा व्याकुल उठती है।। मोहब्बत करने की… Read More

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कविता : यथार्थ की दुनिया में

कई लोग ऐसे हैं बढ़-बढ़कर दूसरों से बोलते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने आप से बोलते हैं अपने में दूसरों को देखना दूसरों में अपने को देखना सबसे बड़ी साधना है मनुष्य का, यथार्थ में, दुनिया में हम देखते… Read More