रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More
रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More
“सूट पहन के , लगा के चश्मा कहाँ चले ओ मतवाले , गिटपिट इंग्लिश बोल रहे हो हिंदी की गले में तख्ती डाले” मैंने यूँ ही पूछा? “चले हम फीजी ,हिंदी के लिये जल मत ओ बुरी नजर वाले पूछा… Read More
गया था आज उनके घर पूछने हाल चाल उनका। मगर थे नहीं घर पर वो इसलिए लिख आया पर्ची पर। जब आयेंगे वो घर पर तो पड़ लेंगे मेरी चिट्ठी। और मिलकर या लिखकर बताता देंगे अपना हालचाल।। मिला है… Read More
मातृभूमि से है गहरा नाता, शिवाजी महाराज की है यह गाथा, बाल शिवाजी को माता जीजाबाई ने, देश प्रेम का ज्ञान दिया, वीर शिवाजी के पिता ने, रण कौशल का ज्ञान दिया शिवाजी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 00
दिलमें दीपक जल उठे देख तुझे फिर से। लौटा हूँ अपने घर जो वर्षो के बाद। हाल तेरा मैं कैसे पूंछू बात करने से डरता हूँ। कहने सुनने के लिए नहीं बचा है अब कुछ।। मन की बातें मन ही… Read More
तो हस्तिनापुर के समीप इंद्रप्रस्थ जो कि अब दिल्ली के नाम से जाना जाता है , यही मेरे व्यंग्य का खांडव वन रहा है ।अब व्यंग्य के कई अर्जुन मेरे इस खांडव वन अर्थात व्यंग्य लोक को जलाने पर आतुर… Read More
लिख तूँ लिख, सबकी सच्चाई लिख। सच लिखने में डरना मत, असली बकने में झिझकना मत। बेईमान तोय दबायेंगे, तूँ हरहाल में दबना मत। मौत से कभी डरना मत, काय मौत के बाद, फिर से जनम मिलता है। ईसें यी… Read More
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश भर में छात्रों के हितों की बात करता रहा है। परिषद लगातार छात्र हितों के लिए प्रयासरत है। विद्यार्थी परिषद का मुख्य उद्देश्य समाज में सामाजिक सौहार्द तथा भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत… Read More
मेरा मन बहुत चंचल है पर दिल मेरा स्थिर है। फिर भी सपनो में वो न जाने क्यों आते है। और अपने साथ होने का मुझे एहसास कराती है। जिसे कारण ही मेरी आत्मा व्याकुल उठती है।। मोहब्बत करने की… Read More
कई लोग ऐसे हैं बढ़-बढ़कर दूसरों से बोलते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने आप से बोलते हैं अपने में दूसरों को देखना दूसरों में अपने को देखना सबसे बड़ी साधना है मनुष्य का, यथार्थ में, दुनिया में हम देखते… Read More