कविता : क्या क्या नहीं दिया तूने

अगर दर्द न होता तो खुशी की कीमत न होती। अगर चाहने से मिल जाता सब कुछ दुनियाँ में तो..। ऊपर वाले की किसी को जरूरत न होती। और खुद ही बन जाता अपना भाग्य विधाता।। भूला दो बीता हुआ… Read More

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कविता : बसन्त ने छेड़ी तान

मन्द मन्द बसंत ने छेड़ी तान भक्ति भी खड़ी लिए फूलो का हार।। सरयू तट है उदार बहती है शीतल धार नव सुगन्ध भरती कल – कल धारा बहती।। सरयू तट पर राम झाकी धनुष बाण लिए हाथ पीताम्बर तन… Read More

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मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है : सुर साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर

सुर साम्राज्ञी, स्वर कोकिला भारतरत्न लता मंगेशकर हमारे बीच सदा युगों-युगों तक अपने गीतों के माध्यम से उपस्थित रहेंगी। संगीत का मतलब लता मंगेशकर कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। या यूँ कहें कि संगीत का जब भी नाम लिया… Read More

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रहें ना रहें हम महका करेंगे : स्वर कोकिला भारतरत्न लता मंगेशकर

भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया की सुर साम्राज्ञी, स्वर कोकिला भारतरत्न लता मंगेशकर जी आज हमारे बीच नहीं रहीं। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँसे ली। बीते कुछ दिनों से उनका अस्पताल में कोरोना का इलाज… Read More

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सूचना : हंसराज कॉलेज द्वारा अंतरराष्ट्रीय संकाय संवर्धन कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय संकाय संवर्धन कार्यक्रम समाज, संस्कृति और विश्वबोध 16 से 22 फरवरी 2022 समय : दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे पंजीकरण की अंतिम तिथि : 12 फरवरी 2022 लिंक : https://bit.ly/3qGXFxG   +400

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भारत में बहुभाषिकता एक स्वाभाविक प्रवृति रही है : गिरीश्वर मिश्र

केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद तथा विश्व हिंदी सचिवालय के तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार द्वारा हिंदी और उसकी बोलियों का अंतर्संबंध विषयक ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के… Read More

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आई हेट टीयर्स : बॉलीवुड की आँखों में लाए पुष्पा ने आँसू

पुष्पा, नाम सुनकर फ्लावर समझी क्या? फायर है मैं। अब ये फायर किसी और के लिए हो न हो मगर इस बॉलीवुड के लिए जरूर फायर बन गया है। 83 जैसी फ़िल्म भी फ्लॉप हो गई और इससे पहले बड़े… Read More

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कविता : झूठ

हर जगह कई लोग चुपके – चुपके चलते हैं अपना मुँह छिपाते वो धीरे – धीरे चलते हैं वर्ण-जाति-वर्ग की निशा में एक दूसरे को कुचलाते भेद – विभेद, अहं की आड़ में असमर्थ बन बैठे हैं मनुष्य एक दूसरे… Read More

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कविता : पूस की बरसात

देखे थे मैंने सावन-भादों झूमते हर बार, पहली बार पूस की रातों को बरसते देखा था। भादों की चाँदनी में पेड़ तो जगमगाए थे पूस की रातों में जुगनुगों को झुरमुट से झाँकते पहली बार देखा था। पूस की उन… Read More