dr rajendra prasad

कविता : डॉ. राजेंद्र प्रसाद

जीरादेई सीवान बिहार में तीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में, जन्मा था एक लाल। दुनिया में चमका नाम उसका, थे वो बाबू राजेंद्र प्रसाद।। तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष बन, संविधान सभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रपति बन राजेंद्र बाबू जी, जन… Read More

gurunanak ji

कविता : गुरुनानक जी

कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी, पंजाब (पाकिस्तान) में जन्मा एक बालक, मातु पिता ने नाम दिया था उसको नानक। आगे चलकर ये ही नानक सिख धर्म प्रवर्तक… Read More

chhath parv

कविता : छठ पर्व

छठ तिथि शुक्ल पक्ष कार्तिक में, मनाया जाता ये अनुपम छठपर्व। सूर्यदेव की उपासना का पर्व यह, सौर मंडल के सूर्यदेव का है पर्व।। सूर्योपासना है सर्वश्रेष्ठ पर्व की, सूर्योपासना की थी अत्रि पत्नी ने। और श्रेष्ठतम इस व्रत को… Read More

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लघुकथा : रावण का फोन

ट्रिंग.. ट्रिंग… हैलो जी, आप कौन? मैंनें फोन रिसीव करके पूछा मैं रावण बोल रहा हूँ। उधर से आवाज आई….। रावण का नाम सुनकर मैं थोड़ा घबड़ाया, फिर भी हिम्मत जुटाकर पूछ लिया-जी आपको किससे बात करना है? आपसे महोदय।रावण… Read More

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कविता : विजयदशमी और नीलकंठ

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे, समुद्र मंथन से निकले विष का पान भोले शंकर ने किया था इसीलिए कंठ उनका नीला पड़… Read More

betiyaan

कविता : बेटियाँ

बेटियाँ जीवन का आधार/विचार/व्यवहार खुशियों का संसार हैं। बेटियाँ/पराई हैं सुन सुनकर मुरझाई हैं फिर….भी घर/परिवार/समाज को हर्षायी हैं। बेटियाँ रिश्तों की पहचान को आयाम देती हैं। बेटियाँ पीड़ा सहकर भी मुसकराई हैं। बेटियाँ अपने होने के अहसास को अनवरत… Read More

pariwar

कविता : ऐसा भी होगा

ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा, परिवार बिखर ही नहीं रहे मोह,ममता भी जैसे मर रहे संवेदनाएं जैसे दम तोड़ रही हैं परिवारों में भी किसी को किसी की फिक्र ही नहीं है। हर रिश्ता स्वार्थ… Read More