मंगरू की दादी आँगन में खाट पर पड़ी रहती है। किसी का हृदय पसीजा तो खाना खाने के वास्ते बुलाते हैं। वरना, दादी खुद खाना खाने के वक्त थाली लेकर चली जाती है। वह भी एक बार सुबह और रात… Read More
मंगरू की दादी आँगन में खाट पर पड़ी रहती है। किसी का हृदय पसीजा तो खाना खाने के वास्ते बुलाते हैं। वरना, दादी खुद खाना खाने के वक्त थाली लेकर चली जाती है। वह भी एक बार सुबह और रात… Read More
राँची शहर खुश-मिज़ाज मौसम के लिए जाना जाता है। जेठ मास की अंतिम सप्ताह तक बारिश न होने के कारण आधे से अधिक बोरिंग सूख गया। सोसाइटी वाले बोरिंग तत्काल खोदवा लेते हैं। बोरिंग गाड़ी रात-दिन बोरिंग खोदता रहा। पर… Read More
सर्दी रानी ने जैसे ही, अपने दरवाज़े खोले। बिन बुलाए निंदिया आए, सुस्ती की तूती बोले॥ पलक झुका दुल्हन के जैसे, धूप खड़ी है आंगन में । घर के सारे लोग आ गए , धूप वधू के स्वागत में ॥… Read More
हूँ बहुत टूटा हुआ, बिखरा हुआ घायल निराश मरु में एक भटके पथिक-सा, दिग्भ्रमित- सा हताश प्रेम को प्यासा ह्रदय, व्याकुल स्वभाव ठिठोल को अपनत्व को आकुल है मन, जीवन दो मृदुबोल को बोल जिनको सुनकर मेरा, नयन नीर भी… Read More
अजय कम्बल में दबे – दबे व्हाट्सएप पर सपना से चैट कर रहा है। बगल में गर्लफ्रैंड सीमा लेटी हुई है। रात में ज्यादा थक जाने से वह गहरी नींद में सो रही है और अजय दूसरी का शिकार करने… Read More
रीना भोर अपने आँगन में झाडू लगा रही थी। नाटे और गोरे बदन पर फटी – पुरानी साड़ी पहने, कड़ाके की ठण्ड से रोम – रोम खड़े हो रहे थे और वह मैला – कुचैला हल्का साल ओढ़े रोजाना का… Read More
हर दिन होता रोता धोता । सुनो अगर इतवार न होता॥ जीवन इक ढर्रे पर चलता। फुर्सत वाला समय न मिलता॥ देती नींद हमें उलाहने। ताने देते हमको सपने॥ बैड टी अख़बार का नाता। कभी नहीं पुख़्ता हो पाता॥ अनमने… Read More
गर्भवास का पिंड छुड़ाकर अभी-अभी तो वह बाहर आया है और आते ही बेहोश हो गया था। उसे नहीं मालुम कि वह कितने घंटे बेहोश पड़ा रहा। इस समय वह खुद एक चादर में लिपटा हुआ था। आंख खुलते ही… Read More
मेरे राम हैं तेरे राम, तेरे राम है मेरे राम रामचंद्र जग के रखवारे, सबके काज सँवारे राम। सारी दुनिया भई दीवानी, बनी बाँवरी देख ज़रा चली आ रही धाम अयोध्या, दर्शन देंगें रामलला मंगल गीत गा रहे सारे, ताल… Read More
हमारा देश धर्मप्राण देश रहा है। आध्यात्मिक ऊर्जा यहां के कण-कण में समाविष्ट है। यहां के व्रत-नियमों का सम्बन्ध अध्यात्मदर्शन, देवदर्शन और निरामयता से जुड़ा हुआ है। इसलिए हमारे व्रत-उपवासों की सुदीर्घ परम्परा सदा से चली आयी है। वर्ष में… Read More