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mata rani

कविता : मातारानी को पूजे

करे जो पूजा और भक्ति नवरात्रि के दिनों में। और करते है साधना माता की उपासना करके। तो मिलता है सूकून उसे अपने जीवन में। और हो जाती इच्छाएं उसकी इन दिनों में पूरी।। माता के नौ रूपों को जो… Read More

betiyaan

कविता : बेटियाँ

बेटियाँ जीवन का आधार/विचार/व्यवहार खुशियों का संसार हैं। बेटियाँ/पराई हैं सुन सुनकर मुरझाई हैं फिर….भी घर/परिवार/समाज को हर्षायी हैं। बेटियाँ रिश्तों की पहचान को आयाम देती हैं। बेटियाँ पीड़ा सहकर भी मुसकराई हैं। बेटियाँ अपने होने के अहसास को अनवरत… Read More

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नवरात्र-शक्ति-आराधना

(सर्व अमंगल, मंगलकारी, दुःख-पीड़ा से तारण हारी। जग-तम में तू ही उजियारी, जीव कंटको में फुलवारी। अब तो आजा, हे जग माँ तू, यह दुनियाँ तुझ ही को पुकारी।)… 2 स्मरण तेरा शुरू करें हम, घट को स्थापित करके। घट-घट… Read More

chattann

कविता : चट्टान

ये चट्टान हैं… आजाद -ए- दौर की, इसे चाहे तुम कह दो जो तुम्हारे जी में आए खालिस्तानी, आतंकवादी जो तुम्हे सही लगे। जोड़ दो चाहे रिश्ता उनका चीन और पाकिस्तान से फिर भी उनके हौसले बुलंद हैं, उनके रगों… Read More

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कविता : डरे कोरोना….भागे..

सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम, दुनियां में हुए आगे । एक सुरक्षा कवच बना , जहां ,डरे कोरोना भागे । ताली , थाली, लॉकडाउन सब , जनता के बने हथियार । दुनियां केवल ताकती रह गई, वैक्सीन हमारी… Read More

pariwar

कविता : ऐसा भी होगा

ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा, परिवार बिखर ही नहीं रहे मोह,ममता भी जैसे मर रहे संवेदनाएं जैसे दम तोड़ रही हैं परिवारों में भी किसी को किसी की फिक्र ही नहीं है। हर रिश्ता स्वार्थ… Read More

varnmala

काव्य : नैतिक हिंदी वर्ण माला

अ से अनार ,आ से आम , पढ़ लिख कर करना है नाम। इ से इमली , ई से ईख , पहले भइया इनको सीख । उ से उल्लू ,ऊ से ऊन, हम सबको पढ़ने की धुन । ऋ से… Read More

shikshakji

कविता : शिक्षकों का योगदान

जो कुछ भी हूँ आज मैं, श्रेय मैं देता हूँ उन शिक्षकों। जिन्होंने मुझे पढ़ाया लिखाया, और यहां तक पहुंचाया। भूल सकता नहीं जीवन भर, मैं उनके योगदानों को। इसलिए सदा में उनकी, चरण वंदना करता हूँ ।। माता पिता… Read More

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लेख : “हिन्दी दिवस” एक दिन की जिम्मेवारी

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी भाषा भी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। हिंदी यद्यपि भारत के कई क्षेत्रों में बोली जाती थी, इसी के फलस्वरूप सन 1953 से पूरे भारत में… Read More

गीत : गजानन विदाई

मूषक सवार हो के चले है गजानन, आज अपने भक्तों से विदा हो के। नाँचे और गाएँ ये भक्त मतवाले, गणपति की भक्ति में मगन हो के। झांकी है मनुहार, करे मेरा दिल पुकार। रह जाऊँ इनमें ही आज खो… Read More