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कविता : मोड़ा हुआ ‘किताब’ का पन्ना

कई महीनों से बल्कि साल के बराबर वैसे देखा जाए तो हमेशा से.. रैक में पड़ी किताबे जद्दोजहद करने के बाद भी, सड़को पर निकलकर सांस्कृतिक सामाजिक राजकीय विद्रोह कर पाने में नाकामयाब रही हैं। शायद, यह पूरी तरह सच… Read More

diwali2023

लेख : दीपावली पर दीप जलाये

सब से पहले तो में अपने देशवासियों को दीपावली की बधाई देता हूँ। इस बार की दीपावली आप सभी को नई रोशनी लेकर आये और आपका जीवन खुशियों से भर जाए साथ ही एक निवेदन भी करना चाहूँगा की आप… Read More

AmritaPoem

कविता : गंवारा न था

ये मेरे भीतर छिपी व्याकुलता ही है, जिसने मेरे स्वभाव में अधीरता को जन्म दिया है। माना मेरी बुद्धि संकीर्ण थी और बुद्धजीवियों के व्यापक परंतु, इस संकीर्ण ने ही ढांढस बंधा स्वयं को संभाला, विपरीत व्यथाओं मेँ हर-पल। प्रतिकार,… Read More

PAAN MASALA

नशे की पहली ख़ुराक : इलायची की आड़ में गुटखे का विज्ञापन

फिल्मों के बाद अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने जिस तरीके से सपनों की दुनिया दिखलाने के साथ-साथ इंसानी रिश्तों, जज़बातों और उसके भावनाओं को सबसे ज्यादा कैश कराने का काम किया है, उसमें विज्ञापनों की एक बहुत बड़ी दुनिया है। जो… Read More

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कविता : जिद ने हमको सूरज बनाया है

जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका जमानेके इशारे से जो अपना हर कदम बढ़ाओगे मानो बात या न मानो मगर तुम फिसल जाओगे जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका तुम्हारी रफ्तार से पीछे रहता है तो ये खीझता… Read More

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कविता : मेरे गिरधर ,मेरे कन्हाई जी

जब भी आवाज दूं चले आना , मेरे गिरधर , मेरे कन्हाई जी । रीत प्रीत की भूल न जाना , जो भक्त-भगवान बनाई जी । तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से, दरस को तरसे ये अखियां। बोल बोल-के छेड़े है जग… Read More

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कविता : विजयदशमी और नीलकंठ

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे, समुद्र मंथन से निकले विष का पान भोले शंकर ने किया था इसीलिए कंठ उनका नीला पड़… Read More

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कविता : राम और रावण

रावण न होते तो राम भी कहाँ होते राजकुमार राम तो होते लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम नहीं होते ! धर्म की विजय नहीं होती चक्रवर्ती सम्राट भले होते रावण राम की पहचान हुए मर्यादा की तरफ प्रस्थान हुए माता सीता… Read More

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कविता: माँ

एक अक्षर का शब्द है माँ, जिसमें समाया सारा जहाँ। जन्मदायनी बनके सबको, अस्तित्व में लाती वो। तभी तो वो माँ कहलाती, और वंश को आगे बढ़ाती। तभी वह अपने राजधर्म को, मां बनकर निभाती है।। माँ की लीला है… Read More

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कविता : माँ की आराधना

करे जो सच्चे मन से माँ की आराधना। मिले उसे ही दर्शन माता रानी का। इसलिए तो भक्त जन करते है माँ की उपासना। और पा जाते है अपने जीवन में सब कुछ।। जो माँ को दिल से याद करते… Read More