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anndata kisan

कविता : अन्नदाता किसान

अन्नदाता होकर भी ख़ुद पानी पीकर अपना भूख मिटाएँ पर जग को भूखा न सोने दे ऐसे अन्नदाता किसान हमारे… चाहे आँधी आये या तूफ़ान चिमिलाती धूप हो या कड़ाके की ठण्ड मेहनत करने से यह नहीं घबराते बच्चे समान… Read More

ashirwaad

भजन : आशीर्वाद से

तेरा आशीष पाकर, सब कुछ पा लिया हैं। तेरे चरणों में हमने, सर को झुका दिया हैं। तेरा आशीष पाकर …….। आवागमन गालियां न हत रुला रहे हैं। जीवन मरण का झूला हमको झूला रहे हैं। आज्ञानता निंद्रा हमको सुला… Read More

prakriti

कविता : प्रकृति

1. ऐ प्रकृति ऐ प्रकृति हमसे कुछ कहती है। तुम्हारे सारे शिकवें हमें सवीकार है।। ऐ प्रकृति तेरी हवाएं हमें सुकून देती है। तेरी बेचैनी को हम बखूबी समझते हैं।। ऐ प्रकृति तू हमसे इतना नाराज़ क्यों है? माना हमसे… Read More

kisaan

गीत : किसान

किसान क्या होते हैं तुम गांव वालो से पूछो। ये वो शख्स होते हैं जो खाने देते सबको अन्न। किसान क्या होते हैं तुम गांव वालो से पूछो।। परन्तु इसकी झोली में नहीं मिलता उसका हक, यहीं से गरीबी का… Read More

mat samjho beti ko parai

गीत : मत बेटी नै समझो पराई

मत बेटी नै समझो पराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 1. बेटां पै पड़ै बेटी भारी, बेटी हो घणी आज्ञाकारी, ना ल्यावै कदे बुराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 2. दया, त्याग की मूर्ति बेटी, सेवा के म्हां फिरती बेटी,… Read More

dhanteras

कविता : पाँच दिवसीय पर्व दीपावली

धन की वर्षा हुई बाजारों में , चेहरों पर खुशियों की लड़ियाँ जगमगाई। धन से धन्य दिन-रात हुए जगमग, धन तेरस ने शुरुआत करवाई । कुबेर ने घर आंगन खोला खजाना , धन-धान्य खुशियों की घर-घर लहराई । धन की… Read More

gurunanak dev ji

शोध लेख : श्रमशक्ति के पुजारी श्री गुरु नानक देव

मेहनत वह अनमोल कुंजी है, जो भाग्य के बंद कपाट खोल देती है। यह राजा को रंक और दुर्बल मनुष्य को सबल बना देती है। यदि यह कहा जाए कि श्रम ही जीवन है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गीता… Read More

zindgi abhi aur bhi hai

लेख : ज़िदगी अभी और भी है…

तमाम संघर्षों के बीच भी ज़िदगी होती है। जब हम निराश, हताश और संघर्षों से टूटने लगते हैं तब कभी कभी लगता है कि जीवन बस हमारा इतना ही था। जीवन की शेष संभावनाएं स्वतः खारिज हो जाती है। ऐसे… Read More

suraj

गोलेन्द्र पटेल की कविताएँ

1. किसान है क्रोध ••••••••••••••••• निंदा की नज़र तेज है इच्छा के विरुद्ध भिनभिना रही हैं बाज़ार की मक्खियाँ अभिमान की आवाज़ है एक दिन स्पर्द्धा के साथ चरित्र चखती है इमली और इमरती का स्वाद द्वेष के दुकान पर… Read More

chhath parv

कविता : छठ पर्व

छठ तिथि शुक्ल पक्ष कार्तिक में, मनाया जाता ये अनुपम छठपर्व। सूर्यदेव की उपासना का पर्व यह, सौर मंडल के सूर्यदेव का है पर्व।। सूर्योपासना है सर्वश्रेष्ठ पर्व की, सूर्योपासना की थी अत्रि पत्नी ने। और श्रेष्ठतम इस व्रत को… Read More