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labour working on manrega

कहानी : सौगंध

गाँव में मजदूरों को बारह महीने प्रतिदिन काम नहीं मिलता है। गर्मी के दिनों में कुआँ का पानी सूख जाने के बाद किसान नरेगा में मजदूरी करने जाते हैं। अधिकांश मजदूर गर्मी के दिनों में काम नहीं मिलने पर चैक… Read More

Review Book 'Panchayat'

समीक्षा : पुस्तक ‘पंचायत’

गाँव, गरीबी, किसान, खेतीबाड़ी और ग्रामीण जीवन की दुश्वारियाँ, स्त्रियों की विडंबनाएँ, उनके पहाड़ों से दर्द, सामंती सोच के प्रेतों की क्रूरताएँ व करगुजारियों आदि विसंगतियों – विद्रूपताओं को ध्वस्त करने की अदम्य जिजीविषा लेकर आई है युवा लेखक कुशराज… Read More

Merry christmas

क्रिसमस की शुभकामनाएं

सांता लाए आपके लिए उपहार, जीवन में हो बस प्यार ही प्यार, सब करें आपको दुलार, क्रिसमस हो जाए आपका गुलजार। हैप्पी क्रिसमस डे +30

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कविता: किसान की आबाज

तुम औरें मारत रए भैंकर मार और मार रए अबै भी धीमें – धीमें सें धरम, जात, करजा और कुरीतयंन में बाँधकें अंदबिस्बास, जुमले और बेकार कानून बनाकें पढ़ाई – लिखाई सें बंचित करकें लूटत रए हमें पर अब हम… Read More

indian village poem

कविता : सच में कुछ नहीं बदला

आज बहुत दिनों बाद पहाड़ों की बीच बसे गांवों में जाने का मौका मिला, सच में आज भी गांव में कुछ नहीं बदला.! ठंडी ठंडी हवा चलती है वहां, प्रकृति के शानदार नजारे आकर्षित करते हैं वहां, शहरों में तो… Read More

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कविता : बेटी – बंदनवार

जीवन आशाओं की, आन है बेटी । गाथाऐं ‘ अजस्र ‘ , गुणगान है बेटी । विश्वजागृति जन-अभियान है बेटी । सप्त सावित्री धर्म, पहचान है बेटी । पिता का आदर्श, सम्मान है बेटी । खुद मां का रूप, उपमान… Read More

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कविता : भरोसा नहीं

इंसान का इंसान को ही भरोसा नहीं है। मौत का भी अब किसी को भरोसा नहीं। कब किसकी आ जाये कोई कह सकता नहीं। अब तो चलते फिरते भी छोड़कर चले जा रहे हैं।। हँसते हुए निकले थे सुबह अपने… Read More

poem kese me khoju

कविता : खोज रहा खुदको

मैं खुद को ही खोज रहा। अपने खुद के अंदर। पर वो नहीं मिल रहा। मुझको खुद के अंदर।। कैसे मैं खोजू खुदको। कोई बताओ मुझको। क्या मेरा अस्तित्व है। मेरे खुद के अंदर।। अब चिंता में डूब रहा। मेरा… Read More

kudrat ka nizam babar

व्यंग्य: कुदरत का निजाम

पाकिस्तान की एक रिपोर्टर कुदरत बलोच ने वहां के निवर्तमान कप्तान बाबर आजम से पूछा – “ अब आप कप्तान नहीं रहे, ये कैसा कुदरत का निजाम है “ ? बाबर – “देखें जी कुदरत ये निजाम नहीं आजम है।… Read More

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कविता : काश सभी पेड़

काश सभी पेड़ साल, महुआ होता पिपल, बरगद और तुलसी होता पेड़ कभी न काटा जाता हर वक्त पेड़ को पूजा जाता।। चंदन का है नाम और दाम इनसे शुभ हर घर में काम बेल और आम का महत्व है… Read More