बागड़ प्रदेश के बांसवाड़ा में गोविंद गुरु के सानिध्य में पाई थी तरक्की भीलों ने उनके अथक प्रयास से छोड़ दी थी सारी बेतुकी और बर्बादी की आदतें शराब, जुआं, चोरी और मवेशी खाना गांव-गांव पैदल चलकर करते थे सभा… Read More
बागड़ प्रदेश के बांसवाड़ा में गोविंद गुरु के सानिध्य में पाई थी तरक्की भीलों ने उनके अथक प्रयास से छोड़ दी थी सारी बेतुकी और बर्बादी की आदतें शराब, जुआं, चोरी और मवेशी खाना गांव-गांव पैदल चलकर करते थे सभा… Read More
जंगल में जब टेशू और महुआ खिलते हैं तब सुनाई देती है फाल्गुन की आहट मालवा निमाड़ धरा पर और भगोरिया पर्व की उमंग मिलने को आतुर पिया संग निकले घर से सजकर अपनी पीड़ाओं को तजकर रंग बिरंगी पोशाक… Read More
सुबह राबड़ी का कलेवा करके निकले हैं घर से जोरू और मोहरू ऊंट को पैदल लेकर जंगल में । छोंकड़ा के पेड़ों में उल्टे लटक रहे हैं सींगर हरी हरी लूम के साथ ज्यादा ऊंचाई होने से ऊंट के मुंह… Read More
उतरत दिसंबर की भोर अम्मा ने साक्षी को जगाते हुए बड़े लाड़ – प्यार से कहा – ” उठो बिन्नू! उठो! मुहल्ला के सारे मौड़ी – मौड़ा जग गए हैं। का तुमें उठने नईंयांँ ? जितेंद्र सर की टूशन की… Read More
आओ, खुशियां बाहों में भर लें, आज लक्ष्य नए अपनाए । नए वर्ष की नवकिरणों से, अंधियारों को मिटाए । ‘ अजस्र ‘ आरंभ ये नव वर्ष का, सुखद स्मृतियां आधार बने। दुःख की काली रातें भूलकर, खुशियों के दिन… Read More
नहीं आता है मुझको आह का गान, वियोगी कवि सी नहीं मेरे आलाप की तान, मैं क्यों कर न सका वैसा ही करुण विलाप, जैसे कौंच खग ने किया था वेदना का प्रलाप, मेरे शब्द नहीं बन पाए पीड़ा की… Read More
आज 3 जनवरी को भारत की पहली महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारिका, मराठी की पहली कवयित्री, भारतीय नारीवादी आंदोलन की सूत्रधार, स्त्रियों को मुक्ति की राह दिखाने वाली महामहिला, राष्ट्रमाता पूजनीया किसानिन सावित्रीबाईफुले की जयंती है। सावित्रीबाई फुले की जयंती… Read More
नई साल की राम-राम। नई साल की राम-राम।। सब करो नई उम्मीदों से काम, कोई न बनो काम हराम। सब करो शुरू उम्दा काम, कोई न बनो काम हराम। नए काम की राम-राम। नई साल की राम-राम।। सब गरीबी-अमीरी;ऊँच-नीच; जाति-पाति… Read More
लोगों को इस साल में भले ही कुछ नयापन नजर न आ रहा हो, हमें तो मौजा ही मौजा ही दिख रहा है । चुनावी साल है तो जनता जनार्दन की बल्ले -बल्ले रहने वाली है । व्यंग्यकार को चिकोटी… Read More
थोड़ी खुशियां, थोड़े गम थे, यादें रह गई बाकी। जिनको जो मिलना था मिल गया, कुछ को आशा जरा सी। ‘अजस्र’ आशा से जीवन चलता, दिन-दिन, पल-पल गिन-गिन। आस टूटे तो श्वास टूट जाए, गुजरा साल वो अपना ही। दिन-दिन,… Read More