hindi cinema bhasha

लेख : हिंदी सिनेमा में हिंदी भाषा का बदलता स्वरुप

सिनेमा भाषा के प्रचार-प्रसार का एक बहुत ही अच्छा माध्यम है। सिनेमा में हर तरह की हिंदी के लिए जगह है। फिल्म में पात्रों की भूमिका व परिस्थतियों को देखकर ही भाषा का प्रयोग किया जाता है। जिससे प्रारंभिक दौर… Read More

शोध लेख : रंगमंचीय संसार में उभरता आदिवासी रंगमंच

आदिवासी का शाब्दिक अर्थ है- आदिम युग में रहने वाली जातियां। मूलतः यह वे जातियां है जो 5000 वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता को संजोयें हुए है। आदिवासी भारतीय प्रायद्वीप के मूल निवासी है। मूल निवासी होने के कारण इन्हें सामान्यतः… Read More

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शोध लेख : नारी संघर्ष का प्रतिबिंब ‘सेवासदन’

सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत प्रेमचंद द्वारा रचित ‘सेवासदन’ उपन्यास की रचना आज से लगभग सौ साल पहले 1918 में की गई थी। उर्दू में इस उपन्यास का प्रकाशन 1919 में ‘बाज़ारे-हुस्न’ के नाम से हुआ था। प्रेमचंद अत्यंत संवेदनशील उपन्यासकार… Read More

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शोध लेख : ‘अस्तित्व’ उपन्यास में चित्रित नारी अस्मिता

अस्तित्व से अभिप्राय है स्वयं के होने का बोध अर्थात अपनी खुद की पहचान। यदि बात नारी सन्दर्भ में की जाये तो आज नारी स्वयं के अस्तित्व की तलाश में भटक रही है। वर्तमान प्रगति के बावजूद सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक… Read More

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लेख : स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है। हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे। अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर हावी हो… Read More

shree krishna janmastami sohar

गीत : श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर सोहर

देवकी के बंदी गृह में लाल हुए। लाल का खिलैया कोई नहीं। वहाँ दादी नहीं वहाँ नानी नहीं। लड्डू का बन्धियाँ कोई नहीं। देवकी के बन्दीगृह में लाल हुए। वहाँ लाल का खिलैया कोई नहीं। वहाँ बुआ नही वहाँ मौसी… Read More

लेख : 2050 तक हिंदी दुनिया की सबसे बड़ी भाषा बनने जा रही है

पंख फैला कर उड़ पड़ी है हिंदीदुनिया अब हिंदी की तरफ़ बड़े रश्क से देख रही है। अमरीका, चीन जैसी महाशक्तियां भी अब हिंदी सीखने की ज़रूरत महसूस कर रही हैं और कि सीख रही हैं क्योंकि हिंदी के जाने… Read More

poem shiv maha yogi

कविता : शिव महायोगी

शिव प्रकट हुआ योगी सा बैठा पर्वत की शिखर पर अनुचर समझें ज्योति ब्रह्म का, देखें समीप में उनकों जाकर ध्यानस्थ योगी कहलाया शिव रुद्र समस्त जगत में बना उद्धारक पीड़ित जन का, अपनें अनुचर के संगत में शिव प्रेमी… Read More

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कहानी : दास्तान-ए-भूख

अक्टूबर का महीना, खेतों में धान की खड़ी फसल मंगरे को दिलासा देती थी। बस चंद दिनों की बात है। फसल कट जाए तो न सिर्फ घर में एक छमाही के लिये रसद का जुगाड़ हो जाये बल्कि कुछ पुराने… Read More

sajan bin sawan

कविता : साजन बिन सावन

हो पिया जब परदेश में सावन भी सूखा लगता है सजनी का हर श्रृंगार भी पी बिन अधूरा लगता है बारिश की हरेक बूंद भी तब आग ही बन जाती है सावन की सुहानी रातों में जब याद पिया की… Read More