shikshakji

कविता : शिक्षकों का योगदान

जो कुछ भी हूँ आज मैं, श्रेय मैं देता हूँ उन शिक्षकों। जिन्होंने मुझे पढ़ाया लिखाया, और यहां तक पहुंचाया। भूल सकता नहीं जीवन भर, मैं उनके योगदानों को। इसलिए सदा में उनकी, चरण वंदना करता हूँ ।। माता पिता… Read More

hindi diwas

लेख : “हिन्दी दिवस” एक दिन की जिम्मेवारी

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी भाषा भी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। हिंदी यद्यपि भारत के कई क्षेत्रों में बोली जाती थी, इसी के फलस्वरूप सन 1953 से पूरे भारत में… Read More

गीत : गजानन विदाई

मूषक सवार हो के चले है गजानन, आज अपने भक्तों से विदा हो के। नाँचे और गाएँ ये भक्त मतवाले, गणपति की भक्ति में मगन हो के। झांकी है मनुहार, करे मेरा दिल पुकार। रह जाऊँ इनमें ही आज खो… Read More

raksha bandhan

कविता : बन्धन ये रक्षा का

बंधन ये रक्षा का बहना मांगे वचन ये भाई से। साथ निभाना, लाज बचाना, इस दुनिया हरजाई से माँ बाबा के आँगन पलके थोड़ी सी मैं बड़ी हुई । पाया प्यार तुम्हारा जबसे लगती जैसे दुनियां नई। हाथ तुम्हारा बढ़ा… Read More

happy guru purnima

गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ

गुरु चरणों में गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे, चरणों में अपने, हमको बैठा लो। सेवा में अपनी, हमको लगा लो, गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे। मुझको अपने भक्तो की, दो सेवादारी। आयेंगे सत संघ सुनने , जो भी नर नारी। मैं उनका… Read More

kinkri devi

कविता : किंकरी देवी

न तो वह शिक्षित नहीं क़ानून का ज्ञान बेहद आम सी औरत हिमाचल में था आशियाना उनका किंकरी देवी था जिनका नाम…… पहाड़ों से बेहद लगाव खनन माफिया से बचाने पहाड अकेली ही विरुद्ध खड़ी हो गई उनके…. डराया गया,… Read More

manzil

ग़ज़ल : चलते जा रहे हैं

ख़्याल सब के सब सिमटते जा रहे हैं उम्र से पहले समझते जा रहे हैं उनकी आंखों ने जिन्हे जी भर के देखा ख़ूबसूरत है वो कहते जा रहे हैं जो मयस्सर जिंदगी में अब न होंगे क्यूं उन्हीं का… Read More

buddha

कविता : हार जाएगा संकट

गौतम बुद्ध के मार्ग पर, आज हमें चलना होगा सृष्टि को फिर से स्वर्ग सी उपवन करना होगा।। पंचशील के पाँच तत्वों को अपनाकर मद,मोह,अहंकार को नष्ट करना होगा।। सत्य पर अटल रहकर दूसरों की सेवा करना होगा।। आवश्यकता से… Read More

jivan

कविता : जीवन के क्षण

जीवन के क्षण, कभी हर्षित कभी बोझिल। कभी तेज उजाला, कभी तारों की झिलमिल। कभी खुशियों का खजाना, कभी ग़म में गाफिल। कभी हर ओर सन्नाटा, कभी शोरगुल शामिल। कभी अभाव,तंगहाली , कभी हासिल ही हासिल। कभी हर ओर अपने… Read More

mukti

कविता : ‘मुक्ति-सुसुप्ति’

विकास रहता है आजकल आकाश छूती इमारतों में, भव्य मोटर-गाड़ियों में, शायद उसे वैभव पसंद है। विकास घूमता है बेफिकर पहन कर बरमूडा और निक्कर चौड़ी सड़को में, उसे आकार भी वृहद पसंद है । विकास दिखता है आधुनिक तकनीकी… Read More