jivan

कविता : जीवन के क्षण

जीवन के क्षण, कभी हर्षित कभी बोझिल। कभी तेज उजाला, कभी तारों की झिलमिल। कभी खुशियों का खजाना, कभी ग़म में गाफिल। कभी हर ओर सन्नाटा, कभी शोरगुल शामिल। कभी अभाव,तंगहाली , कभी हासिल ही हासिल। कभी हर ओर अपने… Read More

mukti

कविता : ‘मुक्ति-सुसुप्ति’

विकास रहता है आजकल आकाश छूती इमारतों में, भव्य मोटर-गाड़ियों में, शायद उसे वैभव पसंद है। विकास घूमता है बेफिकर पहन कर बरमूडा और निक्कर चौड़ी सड़को में, उसे आकार भी वृहद पसंद है । विकास दिखता है आधुनिक तकनीकी… Read More

vaccination

कविता : टीकाकरण

जिंदगी को यदि सुरक्षित रखना है। तो दो हाथो की दूरी रखना पड़ेगा। कोरोना से बचाने के लिए। वैक्सिंग वाला कवच लेना पड़ेगा।। हम सबको सुरक्षित रहना है। तो वैक्सिंग को लगवाना होगा। और घर परिवार व समाज में नया… Read More

हिंदी भाषा और बोलियाँ

हिंदी भाषा एवं बोलियाँ

साहित्य सिनेमा सेतु यूट्यूब के इस चैनल में भाषा एवं बोलियाँ, पर्यायवाची, विलोम शब्द, रस, छंद, अलंकार, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, वर्तनी शुद्धि, शब्द, वाक्य, समास, संधि, रचना संसार आदि विषयों का समग्र सार है। साथ ही सभी प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक… Read More

ज़िंदा रहे तो

ग़ज़ल : ज़िंदा रहे तो कल की सहर देखेंगे

गर ज़िंदा रहे यारो,तो कल की सहर देखेंगे रस्ते से हटे कांटे,तो अपनी भी डगर देखेंगे डर डर के जी रहे हैं बंद कमरों में आजकल, गर बदलेगा समां,तो आगे का सफ़र देखेंगे जाने आ जाएँ कब गिरफ़्त में करोना… Read More

yatri

संस्मरण : यात्री हूँ मैं

जीते-जागते निकल जाता हूँ द्वन्द्व के दुर्गम मार्ग को, युद्ध होता है विचारों के विशाल अवनि पर जीत है, हार है स्वीकार है, तिरस्कार है निंदा-स्तुति है, मान-अपमान है मानव के इस जग में, अंतरंग के संगम क्षेत्र में समेटकर… Read More

my poems

मेरी कविताएँ

संघर्ष दहशत से भरी दुनियाँ अजनबी से लोग, बिन पहचाने से रास्ते रसूखदारों की अपनी ही बातें नवाबी कारण कार्य बिना नाम पहचान नहीं व्यस्तता का एक राग अलाप न जाने इंसान गढ़ा था खुदा ने बन गए यहां सभी… Read More

prakriti

कविता : प्रकृति, संस्कृति एवं संसृति

द्वितीय रूप तो अति कोमल, मधुर, स्वभाव है !! राम, कृष्ण, गौतम, तुलसी हो, हो कबीर की नाना चौकी ! नारी ने वो पाठ – पढ़ाया, जिसे आज तक किसी ने न भुला पाया !! ऐसी बेटी को प्रणाम है,… Read More

corona

कोरोना की दूसरी लहर का कहर

कोरोना की गति फिर से तेज है बुलेट ट्रेन की स्पीड लिए है।। बिना मास्क के पहने लोग इसे हरी झंडी दिखाए कोरोना दिन पे दिन बढ़ता जाए।। कोरोना की दूसरी लहर का खौफ बढ़ता जाए दिन दोगुनी उन्नति करता… Read More

Maan

कविता : माँ

एक अक्षर का शब्द है माँ, जिसमें समाया सारा जहाँ। जन्मदायनी बनके सबको, अस्तित्व में लाती वो। तभी तो वो माँ कहलाती, और वंश को आगे बढ़ाती। तभी वह अपने राजधर्म को, मां बनकर निभाती है।। माँ की लीला है… Read More