mamta

लघुकथा : अफ़साना

अफसाना… … ! जिसकी ज़िंदगी उसके नाम की तरह ही गुमनाम है और जिसका संघर्ष उसकी ज़िंदगी की तरह ही अनदेखा। वह एक छोटे से गाँव के निम्न वर्गीय या कह लीजिए शोषित वर्गीय परिवार की बेटी है। शिक्षा का… Read More

manlove

कविता : बुलाते हो और डरते हो

कसम देकर बुलाती हो फिर मिलने से कतराती हो। दिलकी धड़कनो को भी तुम क्यों छुपा रहे हो। और अपने मन की बात क्यों कह नहीं पा रही हो। पर मोहब्बत तुम दिलसे और आँखों से निभा रही हो।। मोहब्बत… Read More

manalone

कविता : सच्चे पथ की खोज

जब से दुनियाँ में आया हूँ तब से ही भागे जा रहा। कभी खुद के लिए तो कभी अपनो के लिए। न जाने मुझे क्या क्या सच में करना पड़ रहा। और जीवन के पथ पर साथ सभी के चल… Read More

freshness

कविता : दुनियाँ में रहना है

पग पग पर कांटे बिछे चलना तुम्हें पड़ेगा। दुनियाँ की जलत को सहना तुम्हें पड़ेगा। जीवन के लक्ष्य को हासिल करना पड़ेगा। और अपने आपको दुनियाँ को दिखाना पड़ेगा।। पग पग पर कांटे बिछे चलना तुम्हें पड़ेगा। दुनियाँ की जलत… Read More

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वंदना : शुभ्रकमल सिंहासना

तू स्वर की देवी, माँ वीणापाणि, शुभ्रकमल सिंहासना । ममतामयी मूरत ,बुद्धि की सूरत , प्रेम पूरण प्रति प्रेरणा । ‘अजस्र ‘ तेरे चरणों में बैठा , कर जोड़े, करता माँ वंदना , ये वंदना ,ये वंदना । तू स्वर… Read More

jesus

कविता : यीशु

भगवन कई, सुखीजन कई, तुमसा ना सृजन होगा; यीशु तुम हो साथ अगर, दुखी ना कोई निर्धन होगा। सेवा करना धर्म सिखाया, निर्बल ने भी संबल पाया, जीवन मे जब बाधा आई, तुमने ही सही मार्ग दिखाया। करते है हम… Read More

jatayuu

कविता : स्त्री का रक्षक

भावनाओं की उत्कृष्टता का, आदर्शवादिता का, प्रेम – समर्पण का समुद्र भरता है दिव्य ग्रंथ रामायण महकाव्य गढ़ता है।। एक बूढ़ा पक्षी एक स्त्री की रक्षा करता है, उम्र से हारा जटायू भी एक विचार करता है, तू काहे इस… Read More

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ग़ज़ल : मेरी आरज़ू रही

मेरी आरज़ू रही आरज़ू, युँ ही उम्र सारी गुज़र गई। मैं कहाँ-कहाँ न गया मगर, मेरी हर दुआ भी सिफ़र गई।। की तमाम कोशिशें उम्र भर, न बदल सका मैं नसीब को। गया मैं जिधर मेरे साथ ही, मेरी बेबसी… Read More

umid

कविता : जीवन का आनंद

होठों पर हंसी हो आँखो में नमी हो। दिल में सुकून हो। तो खुशी झलकती है। और चेहरा कमल सा एक दम खिलता है। इसलिए तो सभी से इनका दिल मिलता है।। जीवन तो मिला है यहाँ हर किसी को।… Read More

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लेख : आठ अस्सी

फुटपाथ के दुकानदार ने सख्त लहजे में कहा “ यहां से जाओ चाचा , अस्सी रुपये में ये चप्पल नहीं मिलेगी,बढ़ाओ अपनी साइकिल यहाँ से “। ये सुनकर वो सोच में पड़ गए कि फुटपाथ की सबसे सस्ती दुकान पर… Read More