शोध लेख : भीष्म साहनी का नाट्य साहित्य सृजन और संदर्भ

प्रगतिशील चेतना संपन्न रचनात्मक भीष्म साहनी के नाटक, हिन्दी नाटकों के संसार में अपनी खास पहचान रखते हैं। यों उनके नाटकों में विद्यमान द्वंद्वात्मक वितान उनके कथा साहित्य में भी पूरी तौर पर समाया है। यही कारण है कि उनकी… Read More

Amritlal Nagar

शोध लेख : अमृतलाल नागर की दृष्टि में ‘ सत्तावनी क्रांति’

1857 का समय भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। ये ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह था। यह विद्रोह दो वर्षों तक भारत के अवध क्षेत्रों में चला। इस ‘सत्तावनी क्रांति’ का आरंभ छावनी क्षेत्रों में छोटी-छोटी… Read More

शोध लेख : आदिवासी पहचान और संस्कृति

अपने जातीय रूप की खोज करना, अपनी जातीय संस्कृति की मूल्यवान विरासत को पहचान और उस पर गर्व करना तथा अपनी जातीय संस्कृति के विकास के लिए अपने राष्ट्र को संगठित करने का संघर्ष चलाना। यह सब मानव समाज में… Read More

motupatlu

व्यंग्य : लंका

“ना रूपया ना पैसा ना कौड़ी रे ये मोटू और पतलू की जोड़ी रे मोटू और पतलू रे” ये गीत गाते हुए प्रकाशक के लाये हुये लड्डू खाते हुए मोटू ने गब्बर स्टाइल में कहा – “अरे पतलू भाई ,… Read More

geeta

गीत : श्री गीता

वेदों का उपकार है गीता उपनिषदों का सार है गीता पढ़कर जीवन सफल हो जाये जीवन का आधार है गीता॥ भौतिकता से दूर है गीता अध्यात्मिकता की उर है गीता मानव चले गर गीता पथ पर विषाद का उसके संहार… Read More

uphar

लघुकथा : विदाई

बड़े साहब का ट्रान्सफर हो गया था। तीस तारीख को उन्हे रिलीव होना था। साहब बड़े उदार दिल के थे। लोकप्रिय भी। इसलिये ऑफिस की  तरफ से उन्हें भव्य विदाई पार्टी देने का निर्णय लिया गया था। एक अच्छे कार्यक्रम… Read More

rishita

कहानी : अटूट बंधन

यह कहानी एक डॉ. के निष्काम कर्म, सेवा, करुणा के दायित्व बोध का संदेश देती हुई डॉ. और मरीज के मध्य कर्तव्य और रिश्तों  की व्यख्या कराती है।  कहानी दो पात्रों के इर्द गिर्द घूमती है पहला पात्र है डॉ… Read More

use and throw

लघुकथा : यूज एंड थ्रो

अदिति… आओ लंच करें… मिली ने टिफिन खोलते हुए कहा। “नो डियर, तुम कर लो, मुझे भूख नहीं है।” अदिति ने विंडो से बाहर देखते हुए कहा। “व्हाट डू यू मीन, भूख नहीं है।” क्या बात है दिवाकर, अभी भी… Read More

value-and-its-practical-side

लेख : मूल्य और उसका व्यावहारिक पक्ष

मूल्य जीवन का संचालक होता है। सकारात्मक और नकारात्मक मूल्यों से हम संचालित होते हैं। जीवन को उसकी श्रेष्ठता के साथ जीने का एक जरिया और एक पक्ष दोनों मूल्य है। मूल्य मनुष्य में निहित मानवीय पक्ष होता है, जो… Read More

pita

कविता : पापा, तुम बिन जीवन रीता है

जिस दिन से तुम छोड़ गए हमको पल-छिन दुख ने दहन किया हमको मन में बैठ गया तब से इक संताप जीवन में अंधेरा यूँ गया था व्याप्त कोई राह न अब तक सूझी हमको। पापा… तुम बिन जीवन… …… Read More