सुख भोग से मदमस्त सोता नहीं हूँ मैं, सोता हूँ कल – कल की धार हूँ कूड़ा – कचरा नहीं जिंदगी का कचर – पचर हूँ वैज्ञानिक पथ में कदम हूँ मैं यात्री हूँ अंतरंग में रग – रेशों में… Read More
सुख भोग से मदमस्त सोता नहीं हूँ मैं, सोता हूँ कल – कल की धार हूँ कूड़ा – कचरा नहीं जिंदगी का कचर – पचर हूँ वैज्ञानिक पथ में कदम हूँ मैं यात्री हूँ अंतरंग में रग – रेशों में… Read More
होते हैं रास्ते विचारों में अनेक टेढ़े – मेढ़े, सीधे – साधे मिट्ठी, कंकड़ – पत्थर के हैं कहीं – कहीं काँटे भी होते। चुनना होगा हमें ही बुद्धि से उचित पथ कौनसा है हमारा निकालना पड़ता है रास्ते से… Read More
“काठ का घोड़ा,लगाम रेत की ,नदी पार तैयारी घटिया कला ,अछूती भाषा,बनते काव्य शिकारी ” कविवर अष्टभुजा शुक्ल की ये कविता ,आजकल घोषित हो रहे काव्य पुरस्कारों के बाबत बिल्कुल सटीक है ।लोग पुरस्कार पाते हैं तब नहीं कहते है… Read More
बच्चों घबराना नहीं कोरॉना आया है नियम का पालन करो पहले तुम कितने हंसते खेलते, पढ़ते थे अब नियम बदल गए चार दिवारी में ही तुम्हें सबकुछ करना है खेल खिलौने मन बेहलाओ पशु पक्षियों से समय बिताओ घर के… Read More
मेरा गम तो छुपा है आंखो में एक तू ही तो है निगाहों में।। अब मेरा इम्तिहान मत लेना जिसके ख्वाबों से दूर रहती हूं, दरअसल वो ही ख़्वाब है तु मेरा।। देख क्या इंतखाब है मेरा लब पे मैने… Read More
“नारी यदि वर्तमान के साथ भविष्य को भी अपने हाथ में ले ले तो वह अपनी शक्ति से बिजली की तड़क को भी लज्जित कर सकती है।” जब नारी अपने कदम आगे बढ़ाती हैं , तो वह कही इतिहास लिख… Read More
एक पहेली सी हो तुम थोड़ी सी जानी पहचानी पास रहती मगर अनजानी सी ।। खुद को समेटे कुछ कहती हुई नज़रे झुकाएं हर वक़्त मुस्कुराती हुई।। चन्द लम्हों में चुरा लेती मुझको दूर हो के हर वक़्त सताती मुझको।।… Read More
जीवन के अलग ढ़ंग है, उसमे बिखरे अनेकों रंग है। प्रकृति का अलग राग है, उसमे अलग ताब है।। प्रकती का तपन मानव को जीवन राग दिखाता है, जीवन में अनेकों रंग दर्शाता है।। प्रकृति में हर कहीं बिखरे है… Read More
पावस आते मन ठहर, भीगे बदन मेरे। समूचा माहौल खुला, याद पनपे तेरे।। भीगा बदन बरसाएं, रिमझिम बारिश हुआ। साजन चले आते हैं, जब बरस बता रहा।। नन्हा पौध रोपण में, जमीन गीली हुईं। अस्तित्व बचाने में, बरसात कहीं गई।।… Read More
तू माटी का एक पुतला है तुझे माटी में ही मिलना है। बस कट पुतली बनकर ही तुझे ये मानव जीवन जीना है। और मानव के इस पुतले को इस खिलौने से खेलना है। फिर कुछ बर्षो उपरांत तुझे उसी… Read More