व्यंग्य : दिवाली ‘पटाखा’ और ‘फुलझड़ियाँ’

जब से इस देश में सनी लियोनी टाइप्ड विदेशी पटाखा क्या आया है तब से न जाने क्यों घर के पटाखे सीलन भरे ही नज़र आने लगे हैं । अब तो माहौल ही ऐसा है कि अपने घर का बम… Read More

एक दिया चौखट पर

नहीं मनती दिवाली अब घर पर कहाँ से शुरू करें बल्बों की झालर लेकर घर की छत के कोने-कोने में अब कोई नहीं घूमता… … पेचकस, टेस्टर, सेलो टेप लेकर दो तीन बिजली के झटके खाकर अब इलेक्ट्रिशियन कोई नहीं… Read More

रोशन दिवाली कब

दीपों की जगमग आज हुई रोशन, चहुँओर लगे देखो खुशहाली। मांवस रात लगे पूनम सी, काली है पर भरपूर उजियाली। पर जिससे हर घर में है रौनक, उसका घर आज लगता है खाली। सीमा पे बैठ वो लिए बन्दूक, भारत… Read More

व्यंग्य : मन का रावण

हाँ, तुम्हारी मृदुल इच्छा हाय मेरी कटु अनिच्छा  था बहुत माँगा ना तुमने किंतु वह भी दे ना पाया था मैंने तुम्हे रुलाया… ये एक तसल्ली भरा सन्देश है उन लोगों की तरफ से जिन्होंने इस बार मन के रावण… Read More

पिता जी के रहते एक दिवाली थी पिता जी के बाद एक दिवाली है

जीवन के 25 वसन्त में यह तीसरी दिवाली होगी जब बिना पिता जी के आशीर्वाद के दिवाली बनाई जाएगी और मेरे जहन में वो यादें हमेशा ताज़ा बनी रहेंगी जो पिता जी के साथ बनी थीं। उन्हें ताउम्र अपने जीवन… Read More

कविता : इंद्रधनुषी रात

इंद्रधनुषी रात थकने सी लगी है। भोर में कोयल कुहकने सी लगी है।। गीत मंगल के सजे तोरण कलश पर तलहथी की छाप उगने सी लगी  है।। गंध-मेंहदी ने किया तन-मन सुवासित बाग में  बेला चमकने सी लगी है।। छंद… Read More

कहानी : आग

गाँव के एक घर में आग लग गई थी, वहीं गाँव के मंदिर में लोग नारियल फोड़ रहे थे। जिस घर में आग लगी थी उस घर का लड़का एक रात किसी दूसरे गाँव की लड़की के साथ उस मंदिर… Read More

पुस्तक समीक्षा : भूख परोसती है अनुपमा गाँगुली का चौथा प्यार

हिंदी साहित्य में नई वाली हिंदी के नाम से मुकाम बना रहे आज के लेखकों में प्रेम सबसे महत्वपूर्ण और केन्द्रीय बिंदु बनकर उभरा है। लेकिन अभी तक मुझे उस तरह के प्रेम में डूबे कहानी के नायक या नायिकाएँ… Read More

पुस्तक समीक्षा : विज्ञप्ति भर बारिश में समय के संक्रमण से जूझती कविता

हिन्दी साहित्य आदिकाल से लेकर आज तक के दो हज़ार वर्ष से भी अधिक का एक दीर्घकालिक समयांतराल पार कर चुका है। इस दौरान इसमें कई आंदोलन हुए, कई विचारधाराओं ने जन्म लिया तथा अपनी साँसें स्वर्णिम इतिहास के रूप… Read More

कविता : जीवन ही पूरा महक जाय जब साथ हो सच्चा मित्र

कुछ पल के लिये कपड़ों को महका देती है इत्र पर जीवन ही पूरा महक जाय जब साथ हो सच्चा मित्र बसा हो कैसा मन में हमारे गलत भाव या दोष भले कभी भी दिखा दे हम उस पर अपना… Read More