Habib Tanvir

साक्षात्कार : हबीब तनवीर पर विशेष

रंजीत कपूर थियेटर एवं फ़िल्मी दुनिया के प्रसिद्ध लेखक एवं निर्देशक हैं। इन्होंने 1973-76 के बीच राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन का कोर्स किया और उसके बाद NSD Repertory Co. से जुड़े रहे। 70 का यही वो दशक है जब… Read More

fateh-e-zindagi

तीन मुक्तक : फतह-ए-जिंदगी

सच्चाई के वास्ते तो हम ख़ुदा से ले लेंगे रार तक कभी भी नहीं रूकेंगें जीवन में मौत से हार तक जब तक रहेगा अपने मन में एक अटल विश्वास तब तक उठेंगी हिलोरें धरा से गगन के पार तक… Read More

gurunanak ji

कविता : गुरुनानक जी

कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी, पंजाब (पाकिस्तान) में जन्मा एक बालक, मातु पिता ने नाम दिया था उसको नानक। आगे चलकर ये ही नानक सिख धर्म प्रवर्तक… Read More

prem

छोटे शहर की बड़ी प्रेम कथाएँ

छोटे-छोटे शहरों में ही बड़ी प्रेमकथाएँ जन्म लेती हैं। भले इतिहास में इनका कोई जिक्र नहीं होता है लेकिन इनमें सुख-दुख के साथ हमेशा एक नया संघर्ष और जिज्ञासाएँ छुपी होती थीं। इन प्रेमकथाओं में भी एक हीरो और एक… Read More

pak cricket

व्यंग्य : “अंधेर नगरी, प्लेबॉय राजा”

कहते हैं कि अगर आप ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी तालीम पूरी कर लें तो दुनिया भर की सबसे टॉप पोस्ट्स के दरवाजे आपके लिए खुल जाते हैं। तमाम मुल्कों के सदर ऑक्सफ़ोर्ड के ही पढ़े होते हैं। ऑक्सफ़ोर्ड भी अपनी… Read More

deep jalayein

कविता : एक दीप जलाएँ, उनके नाम

लड़ियाँ दीपों की, जले चारों ओर, आज हुई जगमग, रोशन दिवाली। चहुँओर चेहरों पर जलते दीपों सी जगमग, चहुँओर ओर देखो खुशचेहरों की खुशहाली। मावस रात भी, लगे पूनम चमकती काली है फिर भी, लगे भरपूर उजियाली। पर जिनसे यहाँ… Read More

chhath

लेख : भोजपुरी समाज की संस्कृति छठ पर्व

ऊजे केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मडराय ओह पर सूगा मडराय उजे खपरी जरईबे आदित के सूगा दिहले जुठिआई उजे मरबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरछाई….! इस गीत की महक से शुरू हुआ यह पर्व… Read More

Asha Singer

संस्मरण : आशा ताई

सुनिए ‘आशा ताई’, हां? अरे सुनिए तो, कहिए तो.. “आप सुनती हीं कहाँ हैं? कब से आशा ताई आशा ताई कर रहें हैं।” अरे, कब से सुन ही तो रही हूँ। वैसे आज आप बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं। आशा… Read More

ravan

लघुकथा : रावण का फोन

ट्रिंग.. ट्रिंग… हैलो जी, आप कौन? मैंनें फोन रिसीव करके पूछा मैं रावण बोल रहा हूँ। उधर से आवाज आई…। रावण का नाम सुनकर मैं थोड़ा घबड़ाया, फिर भी हिम्मत जुटाकर पूछ लिया-जी आपको किससे बात करना है? आपसे महोदय।… Read More

लेख : ज्ञानी और मोक्ष

हमारे विश्व गुरु भारत में हर दूसरा मनुष्य ज्ञानी है। उस दूसरे यानी ज्ञानी के सामने समस्या यह रहती है कि उसके हिसाब से पहले वाला कुछ समझना ही नहीं चाहता। इसलिए किसी से भी कुछ कहने के साथ ही… Read More