astitva

शोध लेख : ‘अस्तित्व’ उपन्यास में चित्रित नारी अस्मिता

अस्तित्व से अभिप्राय है स्वयं के होने का बोध अर्थात अपनी खुद की पहचान। यदि बात नारी सन्दर्भ में की जाये तो आज नारी स्वयं के अस्तित्व की तलाश में भटक रही है। वर्तमान प्रगति के बावजूद सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक… Read More

swatantrata

लेख : स्वतंत्रता से स्वछंदता तक

स्वतंत्रता इस संसार में सबको प्रिय है। हर जीव इसी आस और यतन में रहता है कि वह स्वतंत्र रहे। अधिकतर यह देखा जाता है कि स्वतंत्रता की चाह जब अधिक हो जाती है तो वह उसके ऊपर हावी हो… Read More

shree krishna janmastami sohar

गीत : श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर सोहर

देवकी के बंदी गृह में लाल हुए। लाल का खिलैया कोई नहीं। वहाँ दादी नहीं वहाँ नानी नहीं। लड्डू का बन्धियाँ कोई नहीं। देवकी के बन्दीगृह में लाल हुए। वहाँ लाल का खिलैया कोई नहीं। वहाँ बुआ नही वहाँ मौसी… Read More

लेख : 2050 तक हिंदी दुनिया की सबसे बड़ी भाषा बनने जा रही है

पंख फैला कर उड़ पड़ी है हिंदीदुनिया अब हिंदी की तरफ़ बड़े रश्क से देख रही है। अमरीका, चीन जैसी महाशक्तियां भी अब हिंदी सीखने की ज़रूरत महसूस कर रही हैं और कि सीख रही हैं क्योंकि हिंदी के जाने… Read More

poem shiv maha yogi

कविता : शिव महायोगी

शिव प्रकट हुआ योगी सा बैठा पर्वत की शिखर पर अनुचर समझें ज्योति ब्रह्म का, देखें समीप में उनकों जाकर ध्यानस्थ योगी कहलाया शिव रुद्र समस्त जगत में बना उद्धारक पीड़ित जन का, अपनें अनुचर के संगत में शिव प्रेमी… Read More

kisani

कहानी : दास्तान-ए-भूख

अक्टूबर का महीना, खेतों में धान की खड़ी फसल मंगरे को दिलासा देती थी। बस चंद दिनों की बात है। फसल कट जाए तो न सिर्फ घर में एक छमाही के लिये रसद का जुगाड़ हो जाये बल्कि कुछ पुराने… Read More

sajan bin sawan

कविता : साजन बिन सावन

हो पिया जब परदेश में सावन भी सूखा लगता है सजनी का हर श्रृंगार भी पी बिन अधूरा लगता है बारिश की हरेक बूंद भी तब आग ही बन जाती है सावन की सुहानी रातों में जब याद पिया की… Read More

guru ji

कविता : गुरु

दीपक समान जलकर रोशनी जग में फैलाए। सच और झूठ बीच अन्तर का बोध कराके सही, गलत का फ़र्क  हमें सिखलाते। कभी संभाला तो कभी डांट लगाई माता-पिता सी, जिन्होंने। नए ज्ञान से अवगत कराके हमें सपनों को सच करने… Read More

hariyali

कविता : सावन-सुरंगा

सरस-सपन-सावन सरसाया। तन-मन उमंग और आनंद छाया। ‘अवनि’ ने ओढ़ी हरियाली, ‘नभ’ रिमझिम वर्षा ले आया। पुरवाई की शीतल ठंडक, सूर्यताप की तेजी, मंदक। पवन सरसती सुर में गाती, सुर-सावन-मल्हार सुनाती। बागों में बहारों का मेला, पतझड़ बाद मौसम अलबेला।… Read More

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कविता : स्वतंत्रता दिवस

संग अपने हर्षोल्लास लेकर पुनः स्वतंत्रता दिवस आया है नमन उन वीरों को जिनके कारण हमने स्वतंत्र भारत पाया है जिनके शौर्य से परतंत्रता हारी स्वतंत्रता का हुआ था आगमन स्मरण करें उनके बलिदानों को देश के अमर जवानों को… Read More