manao

कविता : मनुष्यों की दुनिया में

खाना पहले उनको दो जो सड़कों में, गलियों में भीख माँगते नज़र आते हैं असहाय अवस्था को पारकर आगे बढ़ने में असफल हैं पराजित हैं वे अपने जीवन में आघात हुई है उनके मन पर देह की सुधा भी खो… Read More

dindayal

पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह

पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह सम्पन्न साहित्य अकादमी भोपाल का आयोजन पंडित दीनदयाल जी राष्ट्र ऋषि तुल्य हैं। – उत्तम बैनर्जी पंडित जी का एकात्म मानववाद को पुनः समझने और पालन करने की आवश्यकता – डॉ. विकास दवे सतना ,… Read More

kuch khta kese

कविता : कुछ बातें

कुछ बातें दिल में रही जब तक, कश्ती साहिल पर रही तब तक, जूझता रहा अंतर्मन में, शब्दों की कमी रही जब तक। आँखों से कुछ कहता कैसे, बिन बोले भी रहता कैसे, सागर जितनी मेरी बातें, ख़त में सबकुछ… Read More

shiv

कविता : धर्म कर्म का महीना

लगा है सावन का महीना विचारो में आस्था जगी है। धर्म की ज्योति भी देखो दिलों में जल उठी है। तभी तो सावन में देखो मंदिरो में भीड़ लगी है। और प्रभु दर्शन पाने की सभी में होड़ लगी है।।… Read More

kitab

कविता : रुको मत..पढ़ाई जारी रखो

पसंद नहीं है उन्हें, सहनते नहीं हैं वे दलितों का अच्छे कपड़े पहनना और चेस्मा लगाना, उनके जैसे अस्मिता का जीवन बिताना, गुलाम समझते हैं दलितों को हीन, नीच, अधम समझते हैं वे पुरखों से प्राप्त मूर्ख सांप्रदाय गौरव की… Read More

izahar

ग़ज़ल : अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है

अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है दिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है इशारा तो करो मुझको कभी अपनी निगाहों से अगर है इश्क़ मुझसे तो जताना भी ज़रूरी है अगर कर ले सभी ये… Read More

samundr

ग़ज़ल : अपनों को दूर मत करिये

किसी की रूह को इतना भी, चूर मत करिये इंसान हो कर भी हैवां सा, कसूर मत करिये अच्छा हो अपने कद का भी, अंदाज़ कर लो, देख अपना ही लम्बा साया, गुरूर मत करिये यारा समझ कर कि, अब… Read More

hindi cinema bhasha

लेख : हिंदी सिनेमा में हिंदी भाषा का बदलता स्वरुप

सिनेमा भाषा के प्रचार-प्रसार का एक बहुत ही अच्छा माध्यम है। सिनेमा में हर तरह की हिंदी के लिए जगह है। फिल्म में पात्रों की भूमिका व परिस्थतियों को देखकर ही भाषा का प्रयोग किया जाता है। जिससे प्रारंभिक दौर… Read More

शोध लेख : रंगमंचीय संसार में उभरता आदिवासी रंगमंच

आदिवासी का शाब्दिक अर्थ है- आदिम युग में रहने वाली जातियां। मूलतः यह वे जातियां है जो 5000 वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता को संजोयें हुए है। आदिवासी भारतीय प्रायद्वीप के मूल निवासी है। मूल निवासी होने के कारण इन्हें सामान्यतः… Read More

sewasadan

शोध लेख : नारी संघर्ष का प्रतिबिंब ‘सेवासदन’

सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत प्रेमचंद द्वारा रचित ‘सेवासदन’ उपन्यास की रचना आज से लगभग सौ साल पहले 1918 में की गई थी। उर्दू में इस उपन्यास का प्रकाशन 1919 में ‘बाज़ारे-हुस्न’ के नाम से हुआ था। प्रेमचंद अत्यंत संवेदनशील उपन्यासकार… Read More