jiwan

गीत : कलयुग भी सतयुग जैसा लग रहा

कलयुग भी सतयुग जैसा लग रहा विद्यासागर जी के कामों से। कितने जीवों के बच रहे प्राण उनकी गौ शालाओं से।। जीव हत्या करने वाले अब स्वयं आ रहे उनकी शरण में। लेकर आजीवन अहिंसा का व्रत स्वयं करेंगे उनकी… Read More

a man siting on sunset

जीवन भी गणित

हम और हमारे जीवन का हर पल किसी गणित से कम नहीं है, जीवन में जोड़ घटाव भी यहाँ कम कहाँ है, गुणा भाग का खेल तो चलता ही रहता है। कभी जुड़ना तो कभी घटना शेष भी रहता सदा… Read More

happy international women's day

कविता : महिला प्रबंधक

बिना वेतन जो काम करे, न कोई छुट्टी,न कोई गम। बस समय पर काम करे और लोगों को खुश रखे। बता सकते हो, ये कौन है? जो निस्वार्थ भाव से करती है। ये और कोई नहीं घर की एक महिला… Read More

geet

गीत : प्यारा सा संदेश

गीत मोहब्बत के लिखता हूँ बड़े प्यार से गाता हूँ। अंधेरे दिलों में प्रेम का दीपक बनकर जलता हूँ। और जीने की कला लोगों को सिखाता हूँ। गीत मोहब्बत के लिखता हूँ बड़े प्यार से गाता हूँ।। दिलों में पल… Read More

bhaichar

कविता : खुद की व्याकुलता

सोच सोच कर मन व्याकुल कितना हो गया। भेजा जिसने मुझको क्या वो ही पालेगा। प्रश्न बहुत जटिल है पर हल करना होगा। इसलिए आस्था हमें उस पर रखना होगा।। बैठ दुनिया के मंच पर देख रहा दुनिया को। क्या… Read More

rosni(1)

कविता : इंसानियत जिंदा हो जायेगी

जहाँ पर मिलता है अपनापन वहीं पर सुकून मिलता है। और हृदय में खुशी का बहुत आनंद बना रहता है। दिये की रोशन से जिस तरह प्रकाश चारों तरफ होता है। वैसे ही अपनेपन से जीवन में सदा ही कमल… Read More

vidhawa

लेख : वेदनाओं के फलक पर

भारत के माध्यम बर्गीय परिवार कि है जिसमे पति के न रहने के बाद उसकी अमानत उसकी संतानो कि परिवरिश और गिरते नैतिकता के समाज में स्वयं और पति के धरोहरों रक्षा कर पाना विधवा के लिये चुनैति और जीवन… Read More

Bhisham-Sahni

भी‍ष्म साहनी – एक सांस्कृतिक चेतना पुरू‍ष

भी‍ष्म साहनीजी के स्मरण मात्र से उनकी कालजयी रचना “तमस” की याद ताजा हो उठती है। इस उपन्यास का एक पात्र नत्थू, मुराद अली द्वारा पांच रूपये लेकर सुअर मारता है,परन्तु दूसरे दिन, वही सुअर केलेवाली मस्जिद के सामने पडा… Read More

Joint Family

लेख : चहेती

निश्चित रूप से सयुक्त परिवारों में जिन बच्चों का जन्म होता है और लालन पालन होता है उन्हें जीवन समाज रिश्तों कि कीमत भाव भावना का अनुभुव अनुभूति से साक्षात्कार होता है सयुक्त का तात्पर्य ही होता है एक दूसरे… Read More