कविता : अब तो संभल

अब  तो  संभल जा  इन्सान  सचेत  कर  रहा   है   भगवान देख  ले  धरती  पे  ये  अजाब गुनाहों  से  तौबा  कर  इन्सान डर  भी  लगता  है  कोरोना से अपनी फितरत को तो पहचान मन में खोट फिर बुरा सोच क्यूं खुदा… Read More

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कविता : कितने मतलबी हो तुम शहर

अपने कमरे की दरारों को तस्वीरों से ढांककर मैंने बनाए तुम्हारे लिए महल चिकनी दीवारें और चमकते फर्श तुम्हारी कारों के लिए पथरीले रास्तों को बदल दिया समतल सड़कों में पार्क, माल, क्या नहीं बनाए तुम्हारे खुश रहने तुम्हे तुम… Read More

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ग़ज़ल : ख़ामोश इश्क़

तलवार से नहीं किसी भी वार से नहीं.    ख़ामोश इश्क़ मिटता है हथियार से नहीं. मैंने ये तो नहीं कहा तुम इश्क़ मत करो. गर तुम करो इश्क़ तो अधिकार से नहीं. देखूं मैं ख़्वाब में तुम्हें मतलब तो… Read More

कविता : सज़ा-ए-मौत

बाज़ुओं के दम पर भूख की हर चुनौती को दरकिनार किये रहता था क़ुसूर बस इतना कि गाँव छोड़ दूर शहर में रहता था बे मौसमी प्रचंड  कोरोनाई धूप में  ज़रा सी छांव की चाह में मर गया चलते चलते… Read More

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ग़ज़ल : प्यार करना कोई बुरी बात नहीं है

प्यार करना कोई बुरी बात नहीं है यार सच्चा प्यार  में तो कोई जात नहीं है यार यहीं तो प्यार, मोहब्बत का अंतिम कयामत है प्यार से पहले कोई दिल खात नहीं है यार। प्यार, मोहब्बत कर लेकिन सीमा से… Read More

जन्मदिन पर विशेष : शरद जोशी

पैनी नजर वाले व्यंग्यकार शरद जोशी विशुद्ध रूप से राजनीतिक लेख जितने भी अच्छे हों उनके पाठकों की संख्या बहुत ही कम होती है। राजनीति विश्लेषण की तुलना में व्यंग्य के पाठकों की संख्या ज्यादा हो सकती है क्योंकि उसके… Read More

कविता : आदि सा हो गया हूँ

सागर से भी गहरा है, हमारा रिश्ता। आसमान से भी ऊंचा है, हमारा रिश्ता। दुआ करता हूँ ईश्वर से की। ऐसा ही बना रहे हमारा रिश्ता।। देखे बिना जान लेता हूँ। बोले बिना ही तुम्हें,  पहचान लेता हूँ। रूह का… Read More

कविता : छोड़ नही सकता

न मैं चल ही सका, न मैं रो ही सका। जिंदगी को मानो, व्यर्थ ही गँवा दिया। तभी तो तन्हा रह गये, और तरस गये प्यार के लिए। पर प्यार करने वाला, कोई मिला ही नहीं। इसलिए तन्हा जिंदगी आज… Read More

कविता : रिफॉर्म

मजदूर रिफॉर्म नहीं जानता  उसे नहीं पता आत्मनिर्भरता का मतलब फॉर्मल/इन फॉर्मल सेक्टर उसे नहीं पता जीडीपी और ग्रोथ इकानॉमी और सेंसेक्स उसे कुछ नहीं पता बड़ी बड़ी बातों के बीच इस बड़ी त्रासदी के बीच उसे केवल यही  पता… Read More

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जन्मदिन विशेष : कविवर सुमित्रानंदन पंत

“वियोगी होगा पहिला कवि  आह से उपजा होगा गान  उमड़ कर ऑखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान।” प्रकृति की महासभा का कुशल वक्ता– कवि जिस मनोदशा में लिख रहा होता है वह गुणात्मक शब्द-शैली के साथ-साथ मन के भीतर… Read More