struggle

कविता : संघर्ष

वो चला था अपने घर को मगर पहुंच पाया क्या ? कितना कष्ट सहा है उसने कभी बताया क्या..? सारी मेहनत निचोड़ दी उसने पैरों को चलाने में, सांस फूलती रही उसकी अपनी व्यथा को बताने में..! अपनी मंज़िल बताने… Read More

लघुकथा : सफलता

सन् दो हज़ार अठारह में प्रशासनिक सेवा हेतु बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा के अंतिम चरण का परिणाम आया था। मनीषा को सफलता प्राप्त हुई थी लेकिन मानव कुछ अंकों से असफल हो गया था। मनीषा और मानव… Read More

love couple

गीत : मुझे क्यो चुना

तुमने मुझे क्यों चुना, मोहब्बत करने के लिए। मुझमें तुम्हें क्या, अच्छा और सच्चा लगा। मैनें तो तुमसे कभी, निगाहें मिलाई ही नहीं। फिर भी तुमने अपना दिल, मेरे को क्यों दिया।। दिल के झरोखों से क्या तुम्हें कोई तरंग… Read More

कविता : दिल के दर्द को पढ़ो

आज कल कम ही, नजर आते हो। मौसम के अनुसार, तुम भी गुम जाते हो। कैसे  मैं कहूँ तुमसे की, मुझे बहुत याद आते हो।। दर्द दिल में बहुत है, बयां कर सकता नही। हम सफ़र बिछड़ गया, पर कह… Read More

घर वापसी : एक जन-विद्रोह

अब मज़दूरों की घर वापसी जन-विद्रोह में तब्दील है, इन की व्यवस्था सेना के सिपुर्द हो  सी ए ए को ले कर मुस्लिम समाज को भड़काने और कोरोना को ले कर मज़दूरों को भड़काने में जो योगदान कांग्रेसियों और कम्युनिस्टों… Read More

कविता : मैं शिक्षक योद्धा हूँ

मुझे कम ना आंको लोगों मैं  शिक्षक राष्ट्र निर्माता हूँ कोरोना  की  इस  जंग  में मेरी भूमिका मै  बताता हूँ । पूरा  समाज  मेरा  ऋणी  है  इस बात को कौन इन्कार करे मैंने तो बस इतना कमाया है मेरे शिष्यों… Read More

लेख : मर्यादा

“एक सामान्य स्त्री जो मर्यादा, सीमाओं, इज्जत और कर्तव्यों के ऐसे चक्रव्यूह में होती है जिसे पार करना असंभव सा प्रतीत होता है, फिर भी उसकी आकांक्षाएं उसे उस चक्रव्यूह के पार सोचने के लिए मजबूर करती है और यह… Read More

कहानी : धक्का

“और इस तरह आज फिर से एक मजदूर ने बिना अपने घर की दहलीज छूए रास्ते में ही दम तोड़ दिया । इन मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन? ये कोरोना वायरस, ये गरीबी, या फिर हमारी ये असंवेदनशील सरकार… Read More

कविता : बुधुआ

बुधुआ ने सुना कि  रेपो रेट में हो गई है कटौती अब कम हो जाएगी ईएमआई गांव के मास्टर साहब से पूछेगा वह उसका मायने उसे ग्रोथ रेट भी जानना है और यह भी जानना है कि एम एस एम… Read More

poem zindagi

कविता : जिंदगी

अलग नहीं हो तुम कभी मुझे से न मैं हूँ कभी अलग तुम से पारस्परिक सहयोग से चलती है जिंदगी अंतिम सांस तक अकेला कोई जी नहीं सकता सह अस्तित्व है प्रबल शक्ति। भेद – विभेद की रचना में अपने… Read More