साहित्य संस्कृति फाउंडेशन द्वारा संस्कृति पर्व का हुआ आयोजन

मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम सभागार में साहित्य संस्कृति फाउंडेशन की ओर से संस्कृति पर्व का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार में कला संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार दिल्ली के… Read More

पुस्तक समीक्षा : पृथ्वी घूम रही है

“पृथ्वी घूम रही है, कहानी संग्रह में जीवन के संघर्ष” प्राचीन समय में भी मौखिक रूप से कथा कहानियों की परंपरा रही है। ज्यादातर कहानियों लोक कथाओं का विशेष महत्व रहा है। समकालीन हिंदी कहानी में भी समाज की विडंबनाएं,… Read More

लघुकथा : आज का नाम ज़िंदगी

मुंबई के कांदिवली इलाके की एक पुरानी बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर वर्मा परिवार रहता था। मध्यमवर्गीय लेकिन बेहद संतुलित और खुशहाल। राजीव वर्मा एक निजी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थे, उनकी पत्नी नीलिमा गृहिणी थीं, और उनका इकलौता बेटा… Read More

सावन, शिव और प्रेम : भावनाओं की त्रिवेणी

सावन का महीना भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना में एक विशेष स्थान रखता है। यह वह समय है जब धरती हरी चादर ओढ़ लेती है, आकाश सावन की फुहारों से सज उठता है और हर ओर हरियाली और शीतलता का… Read More

व्यंग्य : “इश्तहार-ए-इश्क़”

मशहूर शायर जनाब निदा फ़ाज़ली साहब का एक शेर है- “कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन, फिर इसके बाद थोड़ा मुकद्दर तलाश कर”। मगर विज्ञापनों की दुनिया में तो हर काम तुरत-फुरत होना चाहिये । 1-मसलन अगर… Read More

हरिराम को मिलेगा बाबू इंद्रदेव प्रसाद स्मृति सम्मान 2025

राजस्थान के अलवर जिले की कठूमर तहसील के पावटा गांव के हरिराम को आदिवासी और दलित साहित्य लेखन में विशेष योगदान और मानवीय मूल्यों को वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ाने के लिए बाबू इंद्रदेव प्रसाद स्मारक शिक्षा एवं सामाजिक… Read More

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मूवी गपशप : तो क्या सच में दर्शकों के साथ हो गई हेरा फेरी!

क्या बाबू भैया के बिना हेरा फेरी मूवी के बारे में कोई सोच सकता है? पूरी फिल्म को बाबू भैया ही बाहुबली बनकर अपने कंधे पर लेकर आगे चलते हैं। जिसमें उनकी दोनों मजबूत भुजाएँ राजू और श्याम हैं। मगर… Read More

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कविता : ऑपरेशन सिंदूर

शेर-शेरनियाँ घूम रहे थे पहलगाम की वादी में, चूहों ने था घात लगाया, कायरता की आदी में। चूहा अपने बिल से निकला कुछ चूहों को साथ लिए, वादी को आतंकित कर दी बंदूकों को हाथ लिए। बोला अपना धर्म बताओ… Read More

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कविता : लेना होगा पूरा हिसाब

पहलगाम में आतंकी, गुरगों ने कुत्सित काम किया। निहत्थे निर्दोषों का क्यों, उनने कत्ले आम किया? आतंक की दुकाने उनकी, बम गोलियों के हथियार। दहशत का बाजार गर्म कर, षडयंत्रों की मारे मार। खूबसूरत कश्मीर में वो है, बदनामी के… Read More