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कविता : संघर्ष

वो चला था अपने घर को मगर पहुंच पाया क्या ? कितना कष्ट सहा है उसने कभी बताया क्या..? सारी मेहनत निचोड़ दी उसने पैरों को चलाने में, सांस फूलती रही उसकी अपनी व्यथा को बताने में..! अपनी मंज़िल बताने… Read More

कविता : दिल के दर्द को पढ़ो

आज कल कम ही, नजर आते हो। मौसम के अनुसार, तुम भी गुम जाते हो। कैसे  मैं कहूँ तुमसे की, मुझे बहुत याद आते हो।। दर्द दिल में बहुत है, बयां कर सकता नही। हम सफ़र बिछड़ गया, पर कह… Read More

कविता : मैं शिक्षक योद्धा हूँ

मुझे कम ना आंको लोगों मैं  शिक्षक राष्ट्र निर्माता हूँ कोरोना  की  इस  जंग  में मेरी भूमिका मै  बताता हूँ । पूरा  समाज  मेरा  ऋणी  है  इस बात को कौन इन्कार करे मैंने तो बस इतना कमाया है मेरे शिष्यों… Read More

कविता : बुधुआ

बुधुआ ने सुना कि  रेपो रेट में हो गई है कटौती अब कम हो जाएगी ईएमआई गांव के मास्टर साहब से पूछेगा वह उसका मायने उसे ग्रोथ रेट भी जानना है और यह भी जानना है कि एम एस एम… Read More

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कविता : जिंदगी

अलग नहीं हो तुम कभी मुझे से न मैं हूँ कभी अलग तुम से पारस्परिक सहयोग से चलती है जिंदगी अंतिम सांस तक अकेला कोई जी नहीं सकता सह अस्तित्व है प्रबल शक्ति। भेद – विभेद की रचना में अपने… Read More

कविता : अब तो संभल

अब  तो  संभल जा  इन्सान  सचेत  कर  रहा   है   भगवान देख  ले  धरती  पे  ये  अजाब गुनाहों  से  तौबा  कर  इन्सान डर  भी  लगता  है  कोरोना से अपनी फितरत को तो पहचान मन में खोट फिर बुरा सोच क्यूं खुदा… Read More

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कविता : कितने मतलबी हो तुम शहर

अपने कमरे की दरारों को तस्वीरों से ढांककर मैंने बनाए तुम्हारे लिए महल चिकनी दीवारें और चमकते फर्श तुम्हारी कारों के लिए पथरीले रास्तों को बदल दिया समतल सड़कों में पार्क, माल, क्या नहीं बनाए तुम्हारे खुश रहने तुम्हे तुम… Read More

कविता : सज़ा-ए-मौत

बाज़ुओं के दम पर भूख की हर चुनौती को दरकिनार किये रहता था क़ुसूर बस इतना कि गाँव छोड़ दूर शहर में रहता था बे मौसमी प्रचंड  कोरोनाई धूप में  ज़रा सी छांव की चाह में मर गया चलते चलते… Read More

कविता : आदि सा हो गया हूँ

सागर से भी गहरा है, हमारा रिश्ता। आसमान से भी ऊंचा है, हमारा रिश्ता। दुआ करता हूँ ईश्वर से की। ऐसा ही बना रहे हमारा रिश्ता।। देखे बिना जान लेता हूँ। बोले बिना ही तुम्हें,  पहचान लेता हूँ। रूह का… Read More

कविता : छोड़ नही सकता

न मैं चल ही सका, न मैं रो ही सका। जिंदगी को मानो, व्यर्थ ही गँवा दिया। तभी तो तन्हा रह गये, और तरस गये प्यार के लिए। पर प्यार करने वाला, कोई मिला ही नहीं। इसलिए तन्हा जिंदगी आज… Read More